पार्टी में कौन मिलेगा त्यागी अब हर तरफ दिखेंगे बागी (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, चुनावी राजनीति की बगिया में बगावत के शोले धधकने लगे हैं। जिसे टिकट नहीं मिला वह या तो हताश हो गया या बार्ग बन गया। कार्यकर्ता अपना सेवा का गुणधर्म भूल गए हैं। अपना मतलब पूरा नह हुआ तो आंखें तरेरने लगे।’ हमने कहा, ‘पार्टी हर कार्यकर्ता के मन की मुराद पूरी नहीं कन सकती। जब एक सीट के लिए 10 उम्मीदवार दावा करें तो पार्टी के सामने सवाल उठता है-इतनी बड़ी महफिल है ये दिल इसको दूं या उसको दूं! नेता हर उम्मीदवार के लिए दिलदान नहीं बन सकते। ऐसी हालत में फ्रस्ट्रेटेड कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ करने लगे हैं यह अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसी बात है।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, जिन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया, उनकी हालत ऐसी हो गई कि दिल के अरमां आंसुओं में बह गए, हम भरी दुनिया में तन्हा हो गए। ऐसे असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को श्रद्धा और सबूरी रखनी चाहिए। जो पहले कॉर्पोरेटर रह चुके हैं उन्हें नए चेहरों के लिए जगह खाली करने की उदारता दिखानी चाहिए। इनमें ऐसे लोग हैं जिन्होंने प्रशासक राज के दौरान जिन्होंने प्रशासक राज के दौरान अपने वॉर्ड में झांककर भी नहीं देखा।’ हमने कहा, ‘राजनीति ऐसा फलता-फूलता धंधा है जिसमें लोग वन टू का फोर करते हुए करोड़ों रुपये कमा लेते हैं फिर भी जनसेवी होने का मुखौटा लगाते हैं। इनमें से कितने ही रंगे सियार होते हैं। ये पब्लिक है, सब जानती है, अंदर क्या है बाहर क्या है, सब पहचानती है।’
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पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, यह कैसा अन्याय है कि बाहर से पार्टी में आए दलबदलुओं को उम्मीदवार बनाया गया और निष्ठावानों को ठुकराया गया। सभी तरफ यह हाल है। ऐसे में कार्यकर्ता क्या करें?’ हमने कहा, ‘उन्हें समझना चाहिए कि धीरज का फल मीठा होता है। नेता जो कदम उठाते हैं, उसके पीछे दूरदृष्टि रहती है। भाषण में सिद्धांतवाद की बात करते हैं लेकिन व्यवहार में अवसरवाद अपनाते हैं।’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, संक्रांत में पतंग काटने के अलावा पार्टी के बागी अधिकृत उम्मीदवार के वोट काटने का काम कर सकते हैं। वह कहेंगे- तुम भी वफादार नहीं, हम भी तो दिलदार नहीं।’
लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा