Inauguration Image (Social Media)
Rajagopalachari Statue Replaced Lutyens: राष्ट्रपति भवन से एडविन लुटियंस की प्रतिमा को हटाना भी अब इतिहास में लिखा जाएगा, लेकिन जैसे ही प्रतिमा हटी वैसे ही बवाल शुरू हो गया। कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधा और फिर पॉलिटिकल स्टेटमेंट वॉर शुरू हो गया। बीजेपी ने इसे कांग्रेस की औपनिवेशिक सोच बताया। आपको बता दें कि राष्ट्रपति भवन में अब च्रक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा स्थापित की गई है।
लुटियंस की प्रतिमा को जैसे ही हटाया गया,वैसे ही कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अनावरण वाले फोटो को एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि “लुटियन की जगह राजा जी की मूर्ति लुटियन की बनाई इमारत में रहते हुए अंग्रेजी में ट्वीट” साथ ही उन्होंने आखरी में अंग्रेजी का एक कोट् भी लिखा।
‘लुटियन की जगह राजा जी की मूर्ति’ लुटियन के बनाये भवन में रहते हुए सिर्फ़ अंग्रेज़ी में ट्वीट, जिसमें लिखा है: ‘This initiative is part of series of steps being taken towards shedding the vestiges colonial mindset’ यानि ‘यह पहल औपनिवेशिक सोच के अवशेषों को खत्म करने की दिशा… pic.twitter.com/aCrvorfjkX — Gurdeep Singh Sappal (@gurdeepsappal) February 24, 2026
लुटियंस एक फेमस आर्किटेक्ट थे, जिन्हें दिल्ली के डिज़ाइन से लेकर राष्ट्रपति भवन (तत्कालीन वायसरॉय हाउस) के डिज़ाइन के लिए जाना जाता है। वह अपनी वास्तुकला के चलते पूरी दुनिया में मशहूर हैं,उनकी वास्तुकला में ब्रिटेन और भारतीय कला का मिश्रण साफ दिखाई देता है। ब्रिटेश शासन ने उन्हें दिल्ली और कई अन्य शहरों के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी थी।
कांग्रेस के इस बयान को लपकते हुए भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया (X) पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने सप्पल की मानसिकता को औपनिवेशिक बताया,साथ ही उन्होंने ये भी लिखा कि “यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने आदिवासी राष्ट्रपति को निशाना बनाया है, और दुर्भाग्य से, यह आखिरी बार भी नहीं हो सकता है”।
दरअसल, ऐसा देखा गया है कि कांग्रेस जब भी कोई बयान देती है, वैसे ही भाजपा उसका काउंटर तैयार कर लेती है। लेकिन इस बार सबसे ज्यादा दिलचस्प पहलू यह रहा कि कांग्रेस के वरिष्ट नेता शशि थरूर ने भाजपा के इस फैसले की तारीफ की।
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शशि थरूर ने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट कर लिखा कि “मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि राजाजी को राष्ट्रपति भवन में प्रतिमा से सम्मानित किया गया है। गणतंत्र बनने से पहले, वे भारत के एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल के रूप में राष्ट्रपति भवन के पहले भारतीय अधिपति थे, और उन्होंने अपना पद नए राष्ट्रपति को सौंप दिया था”।