Navabharat Nishanebaaz: सबके मन में यही है सोच, क्यों चर्चा में है कॉकरोच
Cockroach Pest Control: पेस्ट कंट्रोल और कॉकरोच की जिद पर आधारित यह व्यंग्यात्मक संवाद तिलचिट्टे की आदतों, उसकी जीवटता और उससे जुड़ी रोचक जानकारियों को मजेदार अंदाज में प्रस्तुत करता है।
- Written By: अंकिता पटेल
(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
How To Remove Cockroaches: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, हम अपने घर से छिपकली, दीमक, खटमल, झींगुर, मच्छर, भुनगे, चीटियां और कॉकरोच को भगाने के लिए पेस्ट कंट्रोल वालों को बुला रहे हैं। आप चाहें तो अपने यहां भी इस तरह की सफाई करवा लीजिए,’
हमने कहा, ‘आप बाकी सबसे छुटकारा पा सकते हैं, लेकिन कॉकरोच से नहीं। वह बड़ा हठीला होता है। वह दरवाजे-खिड़कियों की सेंध में, आलमारी में, डस्टबिन में, फर्नीचर के जॉइंट में, किसी अंधेरे कोने में कहीं भी छिप जाता है। ऐसे छिपने वाले कॉकरोच को बाहर बुलाने के लिए आप गीत गुनगुनाइए छुपनेवाले सामने आ। छुप-छुप के मेरा जी ना जला, सूरज से किरण, बादल से पवन कब तलक छुपेगी ये तो बता!’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, हम जानते हैं कि पृथ्वी पर डायनासोर के समय से कॉकरोच का अस्तित्व रहा है। आप घर कितना ही साफ रखें, खाने-पीने का सामान खुला न छोड़ें और जूठन न बिखरने दें, कॉकरोच बिना कुछ खाए-पिए कई हफ्तों तक जी सकता है। यह ऐसा जीव है कि सिर काटने पर भी जिंदा रहता है। कॉकरोच जब पलट जाता है तो चल नहीं सकता। तभी उसे चिमटी या कागज से पकड़कर कहीं दूर फेंक आइए। कॉकरोच को हिंदी में तिलचिट्टा और मराठी में झुरळ कहते हैं।’
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हमने कहा, ‘कॉकरोच एक टॉटेम या प्रतीक चिन्ह बन गया है। इन दिनों कॉकरोच जनता पार्टी की चर्चा है जो भ्रष्ट व अक्षम सिस्टम के खिलाफ युवा आक्रोश को दर्शाती है। इसके बैनर तले दिल्ली के जंतर-मंतर पर नौजवानों ने 5 घंटे प्रदर्शन किया। इस पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि पेपर लीक व परीक्षा प्रणाली में धांधली की वजह से 5 छात्रों ने जान दे दी। ऐसे में शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने 7 दिनों में इस्तीफा नहीं दिया तो फिर आंदोलन किया जाएगा।’
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पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, सीजेआई सूर्यकांत ने फर्जी डिग्री वाले वकीलों और बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच कह दिया था। उनकी इस टिप्पणी की रिएक्शन हुई और कॉकरोच जनता पार्टी (केजीपी) बन गई। हमने कहा, ‘चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बजाय सूर्यकुमार यादव की चर्चा कीजिए जिनसे टी-20 टीम की कप्तानी छीन ली गई। दूसरी ओर 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी के कारण टीम में शामिल कर लिया गया।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
