
प्रतीकात्मक तस्वीर (नवभारत डिजाइन)
Pune BJP Politics: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, यदि भारी बेरोजगारी के दौर में कोई पार्टी मेगा भर्ती शुरू कर दे तो जनता को इस नेक काम की प्रशंसा करनी चाहिए। बीजेपी ने उदारता दिखाते हुए नासिक में अन्य पार्टियों के नेता-कार्यकर्ताओं को अपने यहां प्रवेश दिया। पुणे में भी विवादग्रस्त लोगों को निस्संकोच शामिल कर लिया। बीजेपी का रवैया ऐसा है- सबके लिए खुला है दरबार ये हमारा!’
हमने कहा, ‘जब बीजेपी के पास खुद के लाखों निष्ठावान कार्यकर्ता हैं तो बाहरी लोगों की मेगा भर्ती क्यों? ऐसे लोगों को लेकर क्या फायदा जिनमें संघ के संस्कार नहीं हैं और जो सिर्फ अपना उल्लू सीधा करने में विश्वास रखते हैं?’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, मेगा भर्ती को बीजेपी का माघ मेला समझ लीजिए। जो आना चाहे, मजे से आ जाए, प्रयागराज के कुंभ मेले में भी लाखों लोगों की भीड़ होती है। बीजेपी ने भी अपने दरवाजे खोल दिए। जिसमें चुनाव जीतने की क्षमता है वह आकर हमारे यहां शुद्ध और पवित्र हो जाए। बीजेपी ने बदलापुर में भी बदलाव का दौर शुरू किया। वहां पार्टी ने वादग्रस्त तुषार आपटे को स्वीकृत नगरसेवक बना दिया। वह बदलापुर की एक स्कूल में दुष्कर्म का सहआरोपी था। स्कूल में महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए उस पर यह गंभीर आरोप लगा। इस प्रकरण के बाद वह 40 दिनों तक लापता रहा फिर पुलिस के सामने समर्पण कर दिया। सिर्फ 48 घंटों के भीतर उसकी जमानत हो गई। बीजेपी ने बदलापुर में जो 4 नगरसेवक स्वीकृत किए उनमें आपटे भी था। जब जनता की तीव्र प्रतिक्रिया हुई तो उसने पद से इस्तीफा दिया।’
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हमने कहा, ‘अंबरनाथ में भी बीजेपी ने कांग्रेस से निलंबित 12 नगरसेवकों को प्रवेश दिया लेकिन फिर भी महापालिका पर कब्जे का सपना पूरा नहीं हो पाया। वहां एकनाथ शिंदे ने अजीत की राकांपा के 4 सदस्य साथ लेकर बाजी जीत ली। बाद में शिंदे व बीजेपी कार्यकर्ताओं की मारपीट भी हो गई। मतलब यह कि चुनाव के मौके पर कोई सिद्धांत या आदर्श नहीं चलता। सत्ता के लिए हर चाल चलनी पड़ती है। इसीलिए संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि संघ को बीजेपी के चश्मे से मत देखो। बीजेपी के काम में संघ का हस्तक्षेप नहीं है।’
लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा






