विशेष: नकवी का ट्रॉफी ले जाना पाक का खेल आतंक, सम्मान सहित भारत को लौटाएं
Asia Cup: एशिया कप का फाइनल मैच जीतने के बाद जैसे ही एसीसी के चेयरमैन मोहसिन नकवी को पता चला कि भारतीय खिलाड़ी उनके हाथ से ट्रॉफी नहीं लेंगे, वैसे ही वह जिद पर उतर आए कि ट्रॉफी देगें नहीं।
- Written By: दीपिका पाल
नकवी का ट्रॉफी ले जाना पाक का खेल आतंक (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: एशिया क्रिकेट काउंसिल के चेयरमैन और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष, साथ ही पाक सरकार में आंतरिक (गृह) मंत्री मोहसिन नकवी भारतीय खिलाड़ियों के द्वारा उनके हाथ से एशिया कप ट्रॉफी न लिए जाने पर खिसियाकर जिस तरह अपने साथ ट्रॉफी और मेडल्स भी लेकर चले गए, यह पाकिस्तान का खेल के मैदान में आतंक है। एशिया कप का फाइनल मैच जीतने के बाद जब अवार्ड सेरेमनी शुरू हुई, तो जैसे ही एसीसी के चेयरमैन मोहसिन नकवी को पता चला कि भारतीय खिलाड़ी उनके हाथ से ट्रॉफी नहीं लेंगे, वैसे ही वह जिद पर उतर आए कि ट्रॉफी देंगे तो वही।
भारतीय क्रिकेटर वहां मौजूद ओमान क्रिकेट बोर्ड के पदाधिकारी से ट्रॉफी लेने के लिए तैयार थे लेकिन मोहसिन नकवी जिद पर अड़े रहे। पीसीबी चेयरमैन करीब 40 मिनट तक पूरी हठधर्मिता के साथ मंच पर मौजूद रहे लेकिन जब भारतीय खिलाड़ी किसी भी कीमत पर उनके हाथों से ट्रॉफी लेने मंच पर नहीं पहुंचे तो वह खिसियाहट में वहां से चले गए और अपने साथ ट्रॉफी व मेडल्स भी लेते गए। बीसीसीआई सचिव
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देवजीत सैकिया ने पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी की इस हरकत पर उन्हें आड़े हाथों लिया। सैकिया ने कहा है कि बीसीसीआई इस मुद्दे पर आईसीसी मीटिंग में शिकायत दर्ज कराएगी और उन्होंने नकवी को ट्रॉफी वापस करने का अल्टीमेटम भी दे दिया। साथ ही सैकिया ने यह भी कहा है कि जरूरी नहीं कि चेयरमैन ही ट्रॉफी प्रदान करने की जिद करे। मोहसिन नकवी पाकिस्तान की टीम जिस तरह से हारी, उससे बहुत ज्यादा खिसिया गए थे। दरअसल भारत की जीती हुई ट्रॉफी को मोहसिन नकवी या कोई भी आयोजक अपने साथ नहीं ले जा सकता। क्योंकि कोई भी ट्रॉफी उस टूर्नामेंट की संपत्ति होती है। इसलिए यह ट्रॉफी पाकिस्तान के किसी मंत्री या पाक क्रिकेट बोर्ड की निजी संपत्ति नहीं है बल्कि एशिया कप टूर्नामेंट की संपत्ति है और इसे एशिया क्रिकेट काउंसिल के नियमों के अनुसार ही विजेता टीम को सौंपा जाता है। प्रोटोकॉल का उल्लंघन एसीसी के संविधान और टूर्नामेंट कॉन्ट्रैक्ट में भी साफ-साफ लिखा है कि ट्रॉफी पर विजेता टीम का हक है। कभी उन्हें स्थायी ट्रॉफी दी जाती है, कभी उसकी प्रतिकृति।
ऐसे में कोई भी अधिकारी चाहे वह मोहसिन नकवी हो या कोई और वो अपनी मर्जी से जबर्दस्ती किसी टीम को अपने ही हाथों ट्रॉफी देने की जिद नहीं कर सकता और न ही उसको अपने साथ ले जा सकता है। ऐसा करना प्रोटोकॉल और एसीसी के नियमों का सीधा उल्लंघन है। पाकिस्तान की इस हरकत से खेल की दुनिया में भी उसकी छवि एक आतंकी देश के रूप में उभर सकती है। वैसे भी बीसीसीआई के अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा है कि मोहसिन नकवी को जल्द से जल्द ट्रॉफी वापस करनी होगी वर्ना इसका बहुत बड़ा खामियाजा वह स्वयं और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड भुगत सकता है। खिलाड़यों और बोर्ड के पास यह विकल्प होता है कि वे किसी विशेष व्यक्ति से ट्रॉफी लें या न लें। जिन भारतीय खिलाड़यों को पाकिस्तानी खिलाड़यों से हाथ न मिलाने पर समूचा पाकिस्तानी मीडिया और सरकार का प्रचार तंत्र इसे खेल का अपमान साबित करने में तुला था, वही पाकिस्तान इस बात को कैसे लेगा कि अपनी जिद के कारण एक ऐसा व्यक्ति जिसका ट्रॉफी पर कोई अधिकार ही नहीं है।
यह कहने की जुर्रत करे कि अब भारतीय खिलाड़यों को ट्रॉफी नहीं मिलेगी और यह भी कि वो नहीं हम जीते हैं, क्योंकि हमारे पास ट्रॉफी है। भारतीय खिलाड़यों ने पहले से ही यह संकेत साफ शब्दों में दे दिया था कि वे जीते तो पीसीबी चेयरमैन के हाथों ट्रॉफी नहीं लेंगे। ऐसे में जब भारतीय टीम जीत गई, तो मोहसिन नकवी को खुद ही अवार्ड सेरेमनी से अपने आपको अलग कर लेना चाहिए था। वास्तव में यही शिष्टाचार होता, लेकिन इसके बजाय नकवी ने नाटकबाजी की।
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ट्रॉफी और मेडल्स अपने साथ ले जाना सरासर घटिया हरकत है। मोहसिन नकवी ने भारतीय खिलाड़ियों द्वारा उनके हाथों से ट्रॉफी स्वीकार न किए जाने पर राजनीतिक ड्रामा खड़ा करने की कोशिश की, उससे पता चलता है कि वह सब कुछ पहले से तय कर चुके थे और इसे अवार्ड सेरेमनी की स्सक्रिप्ट बना दिया, जितना जल्दी हो सके मोहसिन नकवी भारतीय खिलाड़ियों का जिस ट्रॉफी पर हक है, उसे सम्मान के साथ वापस कर दें, नहीं तो खेल के मोर्चे पर भी पाकिस्तान की वही थू थू हो सकती है।
लेख-लोकमित्र गौतम के द्वारा
