जगन्नाथ रथयात्रा से जुड़े रोचक तथ्य (सौ.सोशल मीडिया)
ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर हिंदुओं का आस्था का मुख्य केंद्र में से एक हैं। उड़ीसा के प्रसिद्ध तीर्थस्थान पुरी में हर साल भगवान जगन्नाथ (Jagannath Rath Yatra 2024) की भव्य रथ यात्रा (Rath Yatra 2024) बड़े ही धूम-धाम एवं हर्षोल्लास के साथ निकाला जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल और प्रभु के दर्शन करने से साधक को पापों से छुटकारा मिलता है। साथ ही, जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है। भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलराम और छोटी बहन सुभद्रा के साथ अलग-अलग रथों पर सवार होकर नगर के भ्रमण करने के लिए निकलते हैं।
इस यात्रा से जुड़ी कई ऐसी परंपराए हैं जो कि प्राचीन काल से निभाई जा रही हैं और आज भी इन परंपराओं को पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जाता है। ऐसे में आइए जानें जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए जिन लकड़ियों का उपयोग होता है उन लकड़ियों को सोने की कुल्हाड़ी से ही क्यों काटा जाता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए जो रथ तैयार किया जाता है। उसकी लकड़ियां किसी आम कुल्हाड़ी से नहीं बल्कि सोने की कुल्हाड़ी से काटी जाती है। इस रथ को बनाने में लगभग दो महीने का समय लगता है और इसकी शुरुआत अक्षय तृतीया के दिन से हो जाती है।
रथ बनाने के लिए सबसे पहले लकड़ियों का चुनाव किया जाता है और वन विभाग के अधिकारियों को मंदिर समिति के लोग सूचना भेजते हैं कि उन्हें रथ के लिए लकड़ियां काटनी है। इसके बाद मंदिर के पुजारी के जंगल जाकर उन पेड़ों की पूजा करते है। जिनकी लकड़ियां रथ के लिए उपयोग होने वाली है। फिर महाराणा यानि कारपेंटर कम्युनिटी के लोग पेड़ों पर सोने की कुल्हाड़ी से कट लगाते है। कट लगाने से पहले सोने की कुल्हाड़ी को पहले भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा से स्पर्श कराया जाता है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है। लेखिका-सीमा कुमारी