वी. डी. सतीशन, फोटो- सोशल मीडिया
VD Satheesan Biography: केरलम की राजनीति में वी. डी. सतीशन एक ऐसा नाम है, जिन्हें सदन में उनकी तार्किक बहस और गहरी कानूनी समझ के लिए जाना जाता है। अक्सर राजनेताओं को रैलियों और बैठकों में व्यस्त देखा जाता है, लेकिन सतीशन के बारे में सबसे खास बात किताबों को लेकर है।
साल 2025 तक सतीशन ने कुल 60 किताबें पढ़ डाली हैं जो कि आज के डिजिटल युग में किसी भी सक्रिय नेता के लिए एक मिसाल है। सतीशन की मानें तो उनके इस शौक ने न केवल उनके ज्ञान के क्षितिज को विस्तार दिया है, बल्कि महिलाओं के प्रति उनके व्यक्तिगत और सामाजिक नजरिए को भी पूरी तरह से बदल दिया है।
विजयन सरकार को सदन में मजबूती से घेरने वाले सतीशन का जन्म 31 मई 1964 को केरल के एर्नाकुलम जिले के नेत्तूर में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा उनके गांव के स्कूल में हुई, जिसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए कोचीन और तिरुवनंतपुरम के प्रतिष्ठित कॉलेजों का रुख किया। सतीशन ने मास्टर ऑफ लॉ (LLM) की डिग्री हासिल की है और साथ ही MSW में पीजी भी किया है।
राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले उन्होंने लगभग 10 वर्षों तक केरल हाई कोर्ट में वकालत की, जिसने उन्हें कानूनी दांव-पेचों का माहिर खिलाड़ी बना दिया। उनके राजनीतिक सफर की नींव उनके छात्र जीवन में ही पड़ गई थी, जब वे महात्मा गांधी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन के सचिव बने थे।
सतीशन का चुनावी सफर साल 1996 में एक हार के साथ शुरू हुआ था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और साल 2001 में नॉर्थ पारवुर निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार विधानसभा पहुंचे। तब से लेकर आज तक वे लगातार पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, जो उनकी जनता के बीच अटूट साख को दर्शाता है।
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सतीशन केवल विधानसभा के ही नहीं, बल्कि ट्रेड यूनियन राजनीति के भी कद्दावर नेता माने जाते हैं। वे कोचीन रिफाइनरीज एम्प्लॉइज एसोसिएशन और टाटा ऑयल मिल्स वर्कर्स यूनियन सहित लगभग एक दर्जन श्रमिक संगठनों के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनकी इस सक्रियता ने उन्हें एक कुशल संगठनकर्ता और श्रमिकों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले एक सशक्त मसीहा के रूप में स्थापित किया है।
सतीशन की राजनीति के पीछे एक गहरा बौद्धिक आधार है, जो उनकी पढ़ने की निरंतर आदत से आता है। साल 2025 में उनकी पढ़ने की सूची में अरुंधति रॉय, अमिताव घोष और रोड्रिगो गार्सिया जैसे विश्व प्रसिद्ध लेखकों की कृतियां शामिल थीं।
इनमें से ‘द मेनोपॉज ब्रेन’ (The Menopause Brain) नामक पुस्तक का उनके जीवन पर सबसे गहरा और भावनात्मक प्रभाव पड़ा। सतीशन ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि इस किताब को पढ़ने के बाद उनकी पत्नी सहित अन्य महिलाओं के प्रति उनके दृष्टिकोण में एक बड़ा और मानवीय बदलाव आया है।