मकर संक्रांति (सौ.सोशल मीडिया)
Makar Sankranti Ekadashi: हर साल पूरे देश में मकर संक्रांति का पावन त्योहार उत्साह और उमंग के साथ धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन से सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और दिन लंबे होने लगते हैं।
भारत में यह पर्व दान-पुण्य, शुद्ध आहार और आपसी सौहार्द का संदेश भी देता है। मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर तिल–गुड़ खाने की परंपरा सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक, आयुर्वेदिक और सामाजिक रहस्य छिपा है। जानिए मकर संक्रांति पर्व तिल–गुड़ खाने की परंपरा क्यों निभाई जाती है?
शास्त्रों में तिल को पवित्र और पाप-नाशक माना गया है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन तिल का सेवन और दान करने से सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसी कारण इस दिन कहा जाता है
तिल गुड़ घ्या, गोड गोड बोला”, यानी जीवन में मिठास और सौहार्द बनाए रखें।
आयुर्वेद एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मकर संक्रांति के दिन ठण्ड अधिक होती है। इस समय तिल गुड़ खाने से शरीर को गर्मी और ऊर्जा मिलती है। इसके अलावा, तिल गुड़ खाने से पेट से जुड़ी समस्या भी दूर होती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है
ठंड के मौसम में तिल–गुड़ का सेवन जोड़ों के दर्द, सर्दी-खांसी और कमजोरी से बचाने में असरदार माना जाता है।
ऐसा बताया जाता है कि, तिल और गुड़ दोनों अलग-अलग होते हुए भी मिलकर एक स्वाद बनाते हैं। यह हमें सिखाता है कि—
मकर संक्रांति सूर्य पूजा का पर्व है। तिल और गुड़ दोनों को सूर्य देव को प्रिय माना गया है। इस दिन तिल से बने लड्डू, चिक्की या तिलकुट खाने से सूर्य दोष शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है।
ये भी पढ़ें- मकर संक्रांति 2026 के दिन किस रंग के कपड़े पहनने से पूरे साल बने रहेंगे शुभ और लाभ के योग?
शरीर को स्वस्थ रखने का उपाय
मन और रिश्तों में मिठास लाने का संदेश
और जीवन को सकारात्मक दिशा देने की सीख है
इसलिए यह परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी प्राचीन काल में थी।