हरतालिका तीज पर ‘फुलेरा’ का क्यों है महत्व, क्या है फुलेरा, जानिए इससे जुड़ी बातें
Importance of phulera: हरितालिका तीज में फुलेरा का बहुत अधिक महत्व है। पूजा के दौरान भगवान शिव के ऊपर जलधारा की जगह फुलेरा बांधा जाता है। फुलेरा को पांच तरह के फूलों से बनाया जाता है।
- Written By: सीमा कुमारी
हरतालिका तीज पर ‘फुलेरा’ का क्यों है महत्व (सौ. डिजाइन फोटो)
Hartalika Teej 2025: श्री कृष्ण जन्माष्टमी के बाद हरतालिका तीज मनाई जाती है। यह त्योहार अखंड सौभाग्य और सुहाग के प्रतीक है। जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। आपको बता दें, पंचांग के अनुसार,साल में 3 बार तीज मनाई जाती है। इन्हीं में से एक है हरतालिका तीज जो इस साल 26 अगस्त, मंगलवार को मनाई जा रही है।
हिन्दू मतों के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही, इस दिन शिवलिंग पर फुलेरा भी बांधा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि शिवलिंग पर हरतालिका तीज के दिन फुलेरा बांधने का क्या महत्व है।
शिवलिंग पर क्यों बांधते हैं फुलेरा हरतालिका तीज पर
आपको बता दें, हरितालिका व्रत में फूलों की शीतलता इनकी भीनी खुशबू वातावरण को शुद्ध और पवित्र बनाए रखती है। इस पर्व में फुलेरा का बहुत ही महत्व है। आदिकाल से यह परंपरा बनी हुई है। माता पार्वती (Maa Parvati) ने भी अनादि शंकर की प्राप्ति के लिए अनेक सुंदर रंगों के पुष्पों से भगवान शिव को प्रसन्न किया था।
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दक्षिण प्रांत में खासकर महिलाएं विभिन्न रंगों का आकर्षक और मनोरम फुलेरा बनाती हैं और घर के चारों ओर पूजा स्थल के साथ-साथ अन्य जगहों पर लगाती हैं। यह माताओं और बहनों को निर्जला उपवास रहने के लिए प्रेरित करती है।
इसलिए बांधा जाता है हरतालिका तीज पर ‘फुलेरा’
ज्योतिषियों के अनुसार, हरतालिका तीज में पूजा करते समय फुलेरा का काफी महत्व है। पूजा के दौरान भगवान शिव के ऊपर जलधारा की जगह फुलेरा बांधा जाता है। फुलेरा को पांच तरह के फूलों से बनाया जाता है। फुलेरा में बांधी जाने वाली 5 फूलों की मालाएं भगवान शंकर की पांच पुत्रियों (जया, विषहरा, शामिलबारी, देव और दोतली) का प्रतीक है।
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सबसे पहले मां पार्वती ने किया था हरतालिका तीज व्रत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां पार्वती ने सबसे पहले हरतालिका तीज व्रत किया था। इस व्रत के दौरान मां पार्वती ने अन्न और जल का त्याग किया था। माता पार्वती के इस कठिन तप से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से मनचाहे वर की कामना और अखंड सौभाग्य के लिए महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत रखती है।
