फुलेरा दूज की सही तिथि और पूजा का मुहूर्त, जानिए क्या भूलकर भी न करें इस दिन

धार्मिक मान्यता है कि फूलेरा दूज के दिन कुछ कामों को करने से श्री कृष्ण नाराज हो सकते हैं और जीवन में कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं फुलेरा दूज के दिन क्या नहीं करना चाहिए
फुलेरा दूज की सही तिथि और पूजा का मुहूर्त, जानिए क्या भूलकर भी न करें इस दिन
फुलेरा दूज का महत्व (सौ.सोशल मीडिया)
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Phulera Dooj 2025: राधा-कृष्ण के प्रेम को समर्पित फूलेरा दूज का पावन पर्व हर साल फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस बार फूलेरा दूज का पावन पर्व 01 मार्च, शनिवार को मनाई जाएगी। बता दें,पूरे विश्व में वृंदावन की होली सबसे ज्यादा मशहूर है। यहां पर पूरे फाल्गुन के महीने में होली खेली जाती है और खासकर फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर यानी फुलेरा दूज के दिन मनाई जाती है।

कहा जाता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी ने एक साथ फूलों की होली खेली थी। इसलिए इस दिन का महत्व सनातन धर्म में बहुत अधिक है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन कुछ कामों को करने से श्री कृष्ण नाराज हो सकते हैं और जीवन में कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं फुलेरा दूज के दिन क्या नहीं करना चाहिए

कब है फुलेरा दूज 2025

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह (Kab Hai Phulera Dooj 2025) के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की शुरुआत 01 मार्च को रात्रि 03 बजकर 16 मिनट से हो रही है। वहीं, तिथि का समापन 02 मार्च को रात्रि 12 बजकर 09 मिनट पर होगा। इस प्रकार 01 मार्च को देशभर में फुलेरा दूज का पर्व मनाया जाएगा।

फुलेरा दूज में इन कार्यों से करें परहेज

  • फुलेरा दूज के अवसर पर धूम्रपान, शराब और मांसाहार का सेवन वर्जित है।
  • फुलेरा दूज का पावन तिथि प्रेम का प्रतीक है। इसलिए इस दिन किसी से झगड़ा नहीं करना चाहिए।
  • इस दिन किसी को अपशब्द नहीं बोलने चाहिए। और बड़े-बुजुर्गों तथा महिलाओं का अपमान नहीं करना चाहिए।
  • फुलेरा दूज के दिन श्री राधा-कृष्ण के साथ-साथ भगवान शिव और माता पार्वती की भी पूजा की जाती है, इसलिए भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा करना न भूलें।
  • इस दिन काले रंग के कपड़ें पहनने से भी बचना चाहिए।
  • फुलेरा दूज के दिन श्री कृ्ष्ण और राधा जी की पूजा एक साथ खरने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि दोनों की पूजा अगर अलग-अलग की जाए, तो प्रेम संबंधों में दूरियां आती हैं।
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