‘गणेश चतुर्थी’ मनाए जाने से जुड़ी पौराणिक कथाएं जानिए, क्या है इस दिन का विशेष महत्व
Ganesh Chaturthi: कृष्ण जन्माष्टमी के बाद गणेश चतुर्थी महापर्व की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। यह त्योहार भगवान गणेश के जन्म का प्रतीक है और इसे बहुत उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है।
- Written By: सीमा कुमारी
गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है(सौ. डिजाइन फोटो)
Ganesh Chaturthi katha : 27 अगस्त 2025 से बुद्धि एवं शुभता के देव भगवान गणेश को समर्पित जन्मोत्सव यानी गणेश चतुर्थी का महापर्व शुरू होने जा रहा है। बता दें, 10 दिनों तक चलने वाले महापर्व गणेश चतुर्थी पूरे देशभर में बड़े धूमधाम एवं हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
खासतौर पर, महाराष्ट्र और गुजरात में इस त्योहार की रौनक देखने लायक होती है। इस पर्व पर भक्त रिद्धि–सिद्धि के दाता भगवान गणेश की पूजा करते हैं। घरों, मंदिरों और पंडालों में 10 दिनों तक गणपति की स्थापना कर श्रद्धा-भाव से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान चारों ओर “गणपति बप्पा मोरिया” की गूंज सुनाई देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गणेश चतुर्थी 10 दिनों तक क्यों मनाई जाती है? ऐसे में आइए जानते हैं इस बारे में-
गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है
पौराणिक कथा के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि, महर्षि वेदव्यास जी ने भगवान श्री गणेश से महाभारत ग्रंथ लिखने का आग्रह किया था। भगवान गणेश ने बिना रुके लगातार 10 दिनों तक अपने दांत को कलम बना कर महाभारत लिखी।
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इस दौरान लगातार एक ही स्थान पर लेखन करने के वजह से गणेश जी के शरीर पर धूल और मिट्टी जमा हो गई और 10वें दिन गणेश जी ने सरस्वती नदी में स्नान करके अपने शरीर पर जमी धूल और मिट्टी को साफ किया, तब से गणेश उत्सव के 10वें दिन भगवान गणेश की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है।
दूसरी मान्यता के अनुसार, इन 10 दिनों के दौरान भगवान गणेश पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं, जहां उनके भक्त उनका स्वागत करते हैं और उन्हें अपने घर सेवा के लिए आमंत्रित करते हैं। इस दौरान घरों और सार्वजनिक स्थानों पर उनकी प्रतिमा स्थापित की जाती है। यह त्यौहार दसवें दिन यानी अनंत चतुर्दशी को समाप्त होता है, भगवान गणेश की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है और भक्त उन्हें विदाई देते हैं और अगले साल आने के लिए वचन मांगते हैं।
क्या है गणेश चतुर्थी का महत्व
हिन्दू धर्म में गणेश चतुर्थी का बहुत अधिक महत्व हैं। जैसा कि, आप जानते है कि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। साथ ही किसी भी मांगलिक कार्य में गणेश जी को प्रथम देवता या प्रथम निमंत्रण देवता के रूप में भी पूजा जाता है, इसलिए गणेश चतुर्थी का दिन गणेश जी की स्तुति में विशेष माना जाता है।
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पौराणिक मान्यता है कि जिन लोगों के काम अधूरे रह जाते हैं या काम-धंधे में तरक्की नहीं मिल पाती, उन्हें गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की प्रतिमा को घर पर जरूर लाना चाहिए। 10 दिनों तक गणेश जी की पूजा-अर्चना करने से गणेश जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
