अनंत चतुर्दशी की ये है सही तिथि, नोट कीजिए पूजा का शुभ मुहूर्त और इस दिन की महिमा

Anant Chaturdashi kb hai : सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार अनंत चतुर्दशी व्रत की शुरुआत महाभारत काल से हुई। यह भगवान विष्णु का दिन माना जाता है।
अनंत चतुर्दशी की ये है सही तिथि, नोट कीजिए पूजा का शुभ मुहूर्त और इस दिन की महिमा
कब मनाई जायेगी अनंत चतुर्दशी (सौ.सोशल मीडिया)
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Anant Chaturdashi 2025: सृष्टि के संचालक भगवान श्रीहरि विष्णु के अनंत रूप को समर्पित अनंत चतुर्दशी का पर्व सनातन धर्म में बहुत अधिक महत्व रखता है।आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, अनंत चतुर्दशी का पर्व हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस साल ‘अनंत चतुर्दशी’ का पावन पर्व 6 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी।

आपो बता दें, ये गणेश उत्सव का आखिरी दिन होता है। इस दिन गणेश जी का विसर्जन किया जाता है। ऐसे में आइए जानते है पूजा का मुहूर्त और अनंत सूत्र का महत्व

कब मनाई जायेगी अनंत चतुर्दशी

अनंत चतुर्दशी- शनिवार, 6 सितंबर 2025

अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त - 06:23 पूर्वाह्न से 01:41 पूर्वाह्न तक, 07 सितंबर

अवधि- 19 घंटे 17 मिनट

चतुर्दशी तिथि आरंभ – 06 सितंबर 2025 को प्रातः 03:12 बजे से

चतुर्दशी तिथि समाप्त – 07 सितंबर 2025 को प्रातः 01:41 बजे

ऐसे करें भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा

अग्नि पुराण में अनंत चतुर्दशी व्रत का महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने का विधान है। यह पूजा दोपहर के समय की जाती है। इस व्रत की पूजा विधि इस प्रकार है-

1. इस दिन सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें और पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें।

2. कलश पर आठ पंखुड़ियों वाले कमल के आकार के पात्र में कुश से बने अनंत को स्थापित करें या आप चाहें तो भगवान विष्णु का चित्र भी रख सकते हैं।

3. इसके बाद एक धागे को कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर अनंत सूत्र तैयार करें, इसमें चौदह गांठें होनी चाहिए। इसे भगवान विष्णु के चित्र के सामने रखें।

4. अब षोडशोपचार विधि से भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की पूजा शुरू करें और नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें। पूजा के बाद अनंत सूत्र को भुजा पर बांधें।

अनंत संसार महासुमाद्रे मग्राम संभ्युद्धर वासुदेव।

अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।

5. पुरुषों को दाएं हाथ में और महिलाओं को बाएं हाथ में अनंत सूत्र बांधना चाहिए। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए और परिवार को प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।

अनंत चतुर्दशी का क्या है महत्व

सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार अनंत चतुर्दशी व्रत की शुरुआत महाभारत काल से हुई। यह भगवान विष्णु का दिन माना जाता है। सृष्टि के आरंभ में भगवान अनंत ने चौदह लोकों तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह की रचना की।

इन लोकों की रक्षा और पालन के लिए वे स्वयं चौदह रूपों में प्रकट हुए, जिससे वे अनंत प्रतीत होने लगे। इसलिए अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला और अनंत फल देने वाला माना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने के साथ ही यदि कोई व्यक्ति श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

यह व्रत धन, सुख, समृद्धि और संतान आदि की कामना से किया जाता है। यह व्रत भारत के कई राज्यों में प्रचलित है। इस दिन भगवान विष्णु की लोक कथाएं सुनी जाती हैं।

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