एकादशी व्रत की शुरुआत क्यों होती है उत्पन्ना एकादशी से (सौ.सोशल मीडिया)
Ekadashi Puja Vidhi: एकादशी तिथि को हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया है। यह शुभ दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है और मान्यता है कि एकादशी का व्रत सभी व्रतों में श्रेष्ठ फल देने वाला होता है। एकादशी व्रत की शुरुआत उत्पन्ना एकादशी से की जाती है, क्योंकि इसी दिन एकादशी देवी का प्राकट्य हुआ था।
हिंदू मान्यता के अनुसार, मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली यह एकादशी हर वर्ष बेहद खास मानी जाती है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस व्रत से मिलने वाला पुण्य अश्वमेध यज्ञ के समान बताया गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से जीवन में सद्बुद्धि, सकारात्मकता, धन-समृद्धि और मानसिक शांति बढ़ती है।
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। जो व्यक्ति पहली बार एकादशी व्रत शुरू करना चाहता है, उसके लिए इस एकादशी को सबसे शुभ और फलदायी माना गया है। ऐसे में आइए जानते हैं एकादशी व्रत की शुरुआत क्यों होती है उत्पन्ना एकादशी से?
अगर हिंदू शास्त्रों की बात करें तो, भगवान विष्णु ने दैत्य मुरसुरा के अत्याचारों से देवताओं को बचाने के लिए अपने शरीर से एक दिव्य शक्ति उत्पन्न की। यही शक्ति एकादशी देवी कहलाती है।
उन्होंने असुर का वध कर धर्म की रक्षा की। इसी कारण इस तिथि को एकादशी का जन्मदिन माना जाता है और यहां से व्रत की शुरुआत सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। जो व्यक्ति पहली बार एकादशी व्रत करना चाहता है, उसे उत्पन्ना एकादशी से ही यह शुरुआत करने की सलाह दी जाती है।
गंगाजल, पुष्प, तुलसीदल, चंदन, अक्षत, घी का दीपक, धूप, पंचामृत, मिष्ठान, फल नारियल, सुपारी, मूली, शकरकंद, आंवला, अमरुद, सीताफल, सिंघाड़ा ऋतुफल
हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का बड़ा महत्व बताया गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से मन शांत और स्थिर होता है। जीवन में आने वाली समस्त विध्नं बाधाएं दूर होती हैं।
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धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। वैवाहिक और पारिवारिक सुख बढ़ता है। मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है और पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा भक्तों पर सदेव बनी रहती है।