बिना शादी जगन्नाथ पुरी मंदिर में प्रेमी जोडे़ क्यों नहीं कर सकते है दर्शन, कारण जानकर चौंक जाएगे आप

Jagannath Puri Temple Facts: इस मंदिर में अविवाहित जोड़ों का दर्शन करना वर्जित माना जाता है। इस मंदिर में चाहे प्रेमी-प्रेमिका हों या रिश्ता तय हो चुका हो ऐसे लोगों को मंदिरों में प्रवेश वर्जित होता।
जगन्नाथ पुरी मंदिर के रहस्य
जगन्नाथ पुरी मंदिर के रहस्य (सौ.सोशल मीडिया)
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Mysterious Fact For Jagannath Puri Temple: देश में कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। जो किसी ना किसी देवी-देवताओं की पूजा के लिए समर्पित है। इन मंदिरों की अपनी-अपनी मान्यताएं भी है। जगन्नाथ मंदिर को लेकर वैसे तो कई बातें और महत्व है लेकिन मंदिरों को लेकर मान्यता आज भी प्रचलित है। यहां पर एक परंपरा कहती है। इस मंदिर में शादी-शुदा लोग ही दर्शन कर सकते है।

इस मंदिर में अविवाहित जोड़ों का दर्शन करना वर्जित माना जाता है। इस मंदिर में चाहे प्रेमी-प्रेमिका हों या रिश्ता तय हो चुका हो ऐसे लोगों को मंदिरों में प्रवेश करना सही नहीं होता है।

जानिए क्यों होता है प्रेमी जोड़ों का प्रवेश निषेध

जगन्नाथ मंदिर में प्रेमी जोड़ों या अविवाहित जोड़ों का दर्शन करना निषेध माना जाता है। इसे लेकर पौराणिक कथा प्रचलित है। माना जाता है कि यह परंपरा राधा रानी से जुड़ी है। कथा के अनुसार, एक बार राधा जी श्रीकृष्ण के जगन्नाथ स्वरूप के दर्शन करने पुरी आईं। जब वे मंदिर के अंदर जाने लगीं, तो वहां के पुजारियों ने उन्हें रोक दिया। राधा जी ने आश्चर्यचकित होकर पूछा कि आखिर उन्हें क्यों रोका जा रहा है? पुजारियों ने कहा कि वे श्रीकृष्ण की प्रेमिका हैं और जगन्नाथ मंदिर में भगवान की पत्नियों तक को प्रवेश की अनुमति नहीं है। ऐसे में राधा रानी का प्रवेश भी संभव नहीं है।यह सुनकर राधा रानी बहुत दुखी और क्रोधित हुईं।

कहा जाता है कि उन्होंने उसी समय श्राप दे दिया कि आज से इस मंदिर में कोई भी अविवाहित जोड़ा प्रवेश नहीं कर सकेगा। जो भी अविवाहित जोड़ा यहां आएगा, वह अपने प्रेम में कभी सफल नहीं होगा।

अब तक नहीं बदला नियम

बस, तभी से यह नियम चलता आ रहा है और आज तक बदल नहीं पाया। पुरी जगन्नाथ मंदिर के पुजारी और प्रशासन इस परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं। अगर कोई अविवाहित जोड़ा मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश करता है, तो उन्हें रोक दिया जाता है। यह परंपरा सुनने में भले ही अनोखी लगती हो, लेकिन पुरी के लोग इसे भगवान और राधा रानी की इच्छा मानकर पूरी मान्यता से निभाते हैं।

आईएएनएस के अनुसार

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