गुरुवार व्रत पर भगवान विष्णु की पूजा कैसे करें, जानिए सरल और शुभ विधि

वैसे तो रोजाना घरों में भगवान विष्णु की पूजा की जाती हैं। लेकिन प्रभु की विशेष कृपा पाने के लिए गुरुवार का दिन सबसे शुभ एवं उत्तम माना जाता है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को अति प्रिय है।
गुरुवार व्रत पर भगवान विष्णु की पूजा कैसे करें, जानिए सरल और शुभ विधि
ऐसे करें गुरुवार पर भगवान विष्णु की पूजा (सौ.सोशल मीडिया)
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आज यानी गुरुवार का दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित हैं। वैसे तो रोजाना घरों में भगवान विष्णु की पूजा की जाती हैं। लेकिन प्रभु की विशेष कृपा पाने के लिए गुरुवार का दिन सबसे शुभ एवं उत्तम माना जाता है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को अति प्रिय है।

हिंदू मान्यता अनुसार, गुरुवार के दिन पूजा-पाठ व अन्य शुभ कार्य करने से श्रीहरि भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। वहीं, ज्योतिष में भी गुरुवार की उपासना का महत्व बताया गया है। इस दिन व्रत रखने से कुंडली में गुरु की स्तिथि मजबूत होती हैं।

बता दें, गुरु ज्ञान, विवाह और वैवाहिक सुख के कारक ग्रह है। यदि किसी व्यक्ति के विवाह में बार-बार बाधाएं आ रही हैं, तो अक्सर गुरुवार उपवास या पूजा करने की सलाह दी जाती हैं। मान्यता है कि इसके प्रभाव से समस्त परेशानियां दूर होती हैं। इस दौरान विष्णु जी की पूजा हमेशा संपूर्ण विधि से करनी चाहिए। यह शुभ होता है। ऐसे में आइए गुरुवार की पूजा विधि के बारे में जानते हैं।

ऐसे करें गुरुवार पर भगवान विष्णु की पूजा

  • मान्यता अनुसार, गुरुवार के दिन पूजा के लिए सबसे पहले आप एक चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछा दें।
  • इसके बाद इसपर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को रखें।
  • अब आप प्रभु को पीले चावल अर्पित करें।
  • इसके बाद हल्दी, गुड़, दाल और एक केला भी अवश्य रख लें।
  • विष्णु जी के मंत्रों का जाप करते हुए शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं।
  • अब गुरुवार के व्रत की कथा का पाठ करें।
  •      भगवान विष्णु की आरती करें।
  •      अंत में   गाय को रोटी या गुड़ खिलाएं। इससे सभी तरह की समस्याएं समाप्त होती हैं।

इसके बाद आप अपनी क्षमता के अनुसार पीले रंग के वस्त्र, केला या चने की दाल का दान करें।आप हल्दी भी दान में दे सकते हैं। इससे कुंडली में गुरु की स्थिति मजबूत होती हैं।

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 ऐसे करें भगवान विष्णु की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।

भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।

सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।

तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥

पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।

श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।

तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।

कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥

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