नरसिंह द्वादशी पूजा की क्या है महिमा? जानिए सबसे शुभ मुहूर्त
Narasimha Jayanti 2026: नरसिंह द्वादशी का पावन पर्व भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन भगवान नरसिंह की पूजा और व्रत करने से भय और बाधाएं दूर होती हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
नरसिंह द्वादशी (सौ.सोशल मीडिया)
Narasimha Dwadashi 2026: भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित नरसिंह द्वादशी हर साल फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाया जाता है। इस वर्ष यह द्वादशी 28 फरवरी, शनिवार को मनाया जाने वाला है। धर्म ग्रथों के अनुसार, भगवान नरसिंह ने अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए असुर राजा हिरण्यकश्यप का वध किया था।
उनका स्वरूप आधा मनुष्य और आधा सिंह का था। यह अवतार इस बात का प्रतीक है कि जब भी धर्म पर संकट आता है, तब ईश्वर स्वयं अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। साल 2026 में नरसिंह द्वादशी कब है? शुभ मुहूर्त से लेकर आइए जानते हैं सबकुछ।
नरसिंह द्वादशी का शुभ तिथि और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, द्वादशी तिथि 27 फरवरी 2026 को रात 10:32 बजे से शुरू होकर 28 फरवरी को रात 8:43 बजे समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर व्रत 28 फरवरी को रखा जाएगा। और व्रत का पारण 1 मार्च 2026 को किया जाएगा।
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कैसे करें नरसिंह द्वादशी की पूजा
- सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- साफ और पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
- घर के मंदिर की सफाई करके भगवान नरसिंह की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पंचामृत से अभिषेक करें।
- इसके बाद पीले फूल, अक्षत, फल, मिष्ठान और धूप दीप अर्पित करें।
- पूजा के दौरान विष्णु सहस्त्रनाम या नरसिंह स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है।
- अंत में भगवान को सात्विक भोग लगाकर आरती करें और प्रसाद बांटें।
नरसिंह द्वादशी का क्या है महत्व
सनातन धर्म में नरसिंह द्वादशी का विशेष महत्व होता हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब असुरराज हिरण्यकश्यप ने अत्याचार की सारी सीमाएं पार कर दीं और अपने ही पुत्र प्रह्लाद को भगवान की भक्ति से रोकने के लिए अनेक कष्ट दिए, तब भगवान भगवान विष्णु ने अद्भुत रूप धारण किया।
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वे खंभे से प्रकट हुए और नरसिंह अवतार में अधर्म का अंत किया। यह रूप आधा सिंह और आधा मनुष्य था, जो इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर किसी भी रूप में अपने भक्तों की रक्षा के लिए आ सकते हैं।
नरसिंह द्वादशी हमें यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति, अटूट विश्वास और धर्म के मार्ग पर चलने वाले की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। इस दिन व्रत और पूजा करने से भय, नकारात्मकता और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
