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जितिया व्रत में आखिर क्यों खाते है दही चूड़ा, जानिए उपवास से जुड़ी इस खास परंपरा के बारे में

Jivitputrika Vrat 2025: इस व्रत की विशेषता और परंपराएं काफी है लेकिन इसमें खास है कि, व्रत शुरू होने से पहले माताएं नहाय खाए और फिर सप्तमी की आधी रात को दही चूड़ा खाने की परंपरा को निभाती है।

  • Written By: दीपिका पाल
Updated On: Sep 14, 2025 | 06:58 AM

जितिया व्रत की खास परंपरा (सौ. सोशल मीडिया)

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Jitiya Vrat 2025: आज उत्तरप्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में जितिया व्रत रखा जा रहा है। यह व्रत महिलाएं अपने बच्चे के कल्याण, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए रखती है। इस जितिया व्रत को भी छठ व्रत के तरह ही रखा जाता है यानि नियम एक से होते है। इस व्रत में महिलाओं को निर्जला उपवास रखना होता है यानी कि, दिनभर बिना जल के रहना होता है।

इस व्रत की विशेषता और परंपराएं काफी है लेकिन इसमें खास है कि, व्रत शुरू होने से पहले माताएं नहाय खाए और फिर सप्तमी की आधी रात को दही चूड़ा खाने की परंपरा को निभाती है। आखिर इस परंपरा के पीछे क्या रहस्य छिपा है चलिए जानते है इसके बारे में।

इसलिए खाया जाता है जितिया व्रत में दही चूड़ा

बताया जाता है कि, जितिया व्रत में दही चूड़ा खाने का महत्व होता है जिसे आधी रात को महिलाएं व्रत शुरु करने से पहले खाती है। यहां पर दही चूड़ा पौष्टिकता के साथ साथ पचने में भी हल्का होता है। दही के सेवन से शरीर को ठंडक और चूड़े से पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट मिलता है, जिसके कारण अगले दिन व्रती महिलाओं को निर्जला उपवास रखनी की शक्ति प्राप्त होती है। इसके अलावा दही में जलांश की मात्रा अधिक होती है, जो पेट को लंबे समय तक शांत और ठंडा रखता है,इससे अगले दिन भूख-प्यास ज्यादा नहीं लगती है।

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इस परंपरा को लेकर माना जाता है कि, व्रत मुख्यत भाद्रपद या आश्विन माह में आता है, जब ये मौसम धान कटाई का भी होता है. ऐसे में चावल और चूड़ा जैसे खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। धार्मिक परंपरा के साथ दही चूड़े से स्वास्थ्य को जोड़ा जाता है।

जानिए जितिया व्रत के यह नियम भी

जब माताएं जितिया का व्रत करती हैं, तो उपवास रखने से पहले और पारण के समय खाने-पीने की कुछ खास परंपराएं भी निभाई जाती है.

  • नहाय खाय (व्रत से एक दिन पहले)
  • अरवा का चावल
    कद्दू, झींगा, मूली, अरबी जैसी सब्जियां
    दाल
    देसी घी

व्रत की रात (सप्तमी की अर्ध रात्रि)

दही-चूड़ा

क्षेत्रीय विभिन्नता के कारण कई जगह दूध-चूड़ा या गुड़ के साथ दही चूड़ा का सेवन किया जाता है।यह भोजन हल्का होने के साथ लंबे समय तक ऊर्जा देने वाला भी माना जाता है।

अष्टमी के दिन (व्रत के दिन)

व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखती है।माताएं पूजा-पाठ करने के बाद जीउतिया की कथा सुनती हैं और निर्जला व्रत रखती हैं।

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व्रत का पारण नवमी तिथि को

इस दिन खास तरह के पकवान बनाएं जाते हैं।पूड़ी, कचौड़ी, दाल-भात कद्दू-झींगा, नोनिया का साग, मूली की सब्जी मीठे में ठेकुआ, खीर और गुड़ की मिठाईयां
कई जगहों पर मछली भात (चावल) भी खाया जाता है।

Why do we eat curd and chuda during jitiya fast

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Published On: Sep 14, 2025 | 06:58 AM

Topics:  

  • Jivitputrika Vrat
  • Lifestyle News
  • Sanatan Hindu religion

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