Graveyard Dating: क्या है Gen Z का नया रिलेशनशिप ट्रेंड? आखिर क्यों कब्रिस्तान में डेट पर जा रहे हैं युवा
Graveyard Date: जेन जी के बीच तेजी से चर्चा में है यह नया ट्रेंड, जहां कपल्स कैफे की बजाय कब्रिस्तान में समय बिताना पसंद कर रहे हैं। जानिए इस अनोखे डेटिंग ट्रेंड का मतलब, इसके पीछे की वजह।
- Written By: रीता राय सागर
ग्रेवयार्ड डेटिंग (फोटो.सोशल मीडिया)
Graveyard Dating Trend: कैफे, मूवी या लॉन्ग ड्राइव जैसे ट्रेडिशनल डेट आइडियाज अब पुरानी बात हो गई है। अब कुछ Gen Z कपल्स कब्रिस्तान यानी Graveyard को डेटिंग वेन्यू के तौर पर चुन रहे हैं। सोशल मीडिया पर चर्चा में आए इस ट्रेंड को ‘Graveyard Dating’ कहा जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ एक अजीब ट्रेंड नहीं, बल्कि आज के युवाओं की डीप इमोशन, शांति और अलग एक्सपीरियंस की तलाश के बारे में भी बताता है।
क्या है ग्रेवयार्ड डेटिंग?
साल 2016 में एक फिल्म आई थी कपूर एंड सन्स, जिसमें युवा कपल्, जिसका रोल आलिया भट्ट और सिद्धार्थ कपूर ने निभाया था, ग्रेवयार्ड पर डेट के लिए चलने को कहती है। इसका मतलब है कि कपल्स भीड़भाड़ वाले कैफे या रेस्टोरेंट की बजाय कब्रिस्तान जैसी शांत जगहों पर समय बिताते हैं। वहां वे बिना किसी शोर-शराबे के खुलकर बातचीत करते हैं और अपने रिश्ते को बेहतर समझने की कोशिश करते हैं। कई लोगों के लिए यह एक अनोखा और रोमांचक अनुभव हो सकता है।
Gen Z के बीच क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जेन जी उन विषयों पर भी खुलकर बात करता है जिन्हें पहले टैबू माना जाता था। जैसे मृत्यु, अकेलापन और जीवन का उद्देश्य। कब्रिस्तान का शांत माहौल उन्हें गहरी बातचीत और इमोशनली जुड़ने का मौका देता है। वहीं कुछ युवा इसे पारंपरिक डेटिंग कल्चर से इतर एक अलग अनुभव मानते हैं।
सम्बंधित ख़बरें
Protein Intake: बिना अंडे और मांस के रोजाना 90gm प्रोटीन इस तरीके से पूरा करें, जानें वेजिटेरियन डाइट प्लान
कहीं आपके शरीर में भी तो नहीं है प्रोटीन की कमी? ये 5 लक्षण बताते हैं बड़ा खतरा, जानिए बचाव का तरीका
Jatamansi For Hair: महादेव की प्रिय जड़ी जटामांसी का कमाल! झड़ते, सफेद बालों पर ऐसे करती है चमत्कार
Fasting Workout: व्रत के दौरान जिम जाना सही है या नहीं? जानें एक्सपर्ट्स की सलाह और किन बातों का रखें ध्यान
एक्सपर्ट ने बताए ग्रेवयार्ड के 7 संकेत
अगर किसी रिश्ते में ये बातें लगातार महसूस होने लगें, तो यह इमोशनली सीक होने की पहचान हो सकती है।
- रिश्ते में होने के बावजूद खुद को अकेला महसूस करना।
- पार्टनर से लगातार भावनात्मक सहयोग या आश्वासन की उम्मीद करना।
- पार्टनर के बार-बार भावनात्मक रूप से उपलब्ध न होने को नजरअंदाज करना।
- रिश्ते में खुशी से ज्यादा मानसिक थकान महसूस होना।
- भावनात्मक दर्द या उलझन को ही सच्चा प्यार समझ लेना।
- रिश्ता अस्वस्थ होने के बावजूद उसे छोड़ने की कल्पना न कर पाना।
- रिश्ते की वजह से आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन कम होने लगना।
क्या यह ट्रेंड सभी के लिए सही है?
रिलेशनशिप एडवाइजर का मानना है कि हर व्यक्ति की भावनात्मक सीमाएं अलग होती हैं। यदि किसी खास चीज में असहज महसूस हो, तो केवल पार्टनर को खुश करने के लिए उसमें शामिल होना सही नहीं है। रिश्ते में खुलकर बातचीत करना, अपनी सीमाएं तय करना और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना सबसे जरूरी है।
क्या कहते हैं रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स?
रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी भी ट्रेंड को अपनाने से ज्यादा जरूरी है, अपने रिश्ते को समझना। चाहे डेट किसी कैफे में हो या किसी शांत जगह पर, सबसे अहम बात यह है कि दोनों पार्टनर एक-दूसरे के साथ सहज, सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें। अगर किसी रिश्ते में लगातार इमोशनल ड्रेनेज, तनाव या असुरक्षा महसूस हो रही है, तो खुलकर बातचीत करना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।
