आखिर जगन्नाथ पुरी में भक्तों को क्यों लगाया जाता है ‘दिव्य बेंत’? इसके पीछे छिपा है अनोखा रहस्य
Jagannath Puri Divya Bent: जगन्नाथ पुरी में भक्तों को लगाए जाने वाले 'दिव्य बेंत' की परंपरा सदियों पुरानी है। जानिए इस अनोखी धार्मिक परंपरा का महत्व, इसके पीछे की मान्यता ।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान जगन्नाथ (सौ.AI)
Spiritual Rituals Of Jagannath Puri: भारत के चार प्रमुख धामों में शामिल जगन्नाथ पुरी अपनी भव्यता, आस्था और अनगिनत रहस्यमयी परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यदि कोई श्रद्धालु जीवन में एक बार भी जगन्नाथ धाम के दर्शन कर ले, तो उसकी चारधाम यात्रा का पुण्य पूर्ण माना जाता है।
यह भगवान श्रीकृष्ण का पावन धाम है, जहां वे अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। यहां सदियों से कई ऐसी परंपराएं निभाई जाती हैं, जिन्हें पहली बार सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। ऐसी ही एक अनोखी परंपरा है ‘बेंत प्रसाद’ की।
यहां प्रसाद मिठाई नहीं… बल्कि मिलता है ‘बेंत’ का आशीर्वाद
जगन्नाथ पुरी की सबसे अनोखी परंपराओं में से एक है भक्तों को ‘बेंत’ का स्पर्श कराना। पहली बार सुनने पर यह अजीब जरूर लगता है, लेकिन सदियों से यह परंपरा पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। इसके पीछे भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल से जुड़ी एक बेहद रोचक कथा बताई जाती है।
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मां यशोदा की सीख कैसे बन गई जगन्नाथ धाम की अनोखी परंपरा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण बचपन में अत्यंत चंचल और नटखट थे। उनकी शरारतों से परेशान होकर मां यशोदा उन्हें समझाती थीं और कई बार अनुशासन के लिए बेंत का भी प्रयोग करती थीं।
कहा जाता है कि यही बेंत भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से गहराई से जुड़ गई। बाल गोपाल से द्वारकाधीश बनने तक की यात्रा में यह अनुशासन और संस्कार का प्रतीक मानी गई। इसी कारण जगन्नाथ पुरी में भगवान के समीप बेंत रखने की परंपरा चली आ रही है।
जिस भक्त को लग जाए यह बेंत… उसके बारे में क्या कहती है मान्यता?
मंदिर के पुजारी दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को इस पवित्र बेंत का स्पर्श कराते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के इस बेंत का आशीर्वाद मिलने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है, जीवन की बाधाएं कम होती हैं और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। मान्यता यह भी है कि यह बेंत नारियल की लकड़ी से तैयार किया जाता है और इसे भगवान श्रीजगन्नाथ का विशेष प्रसाद माना जाता है।
क्यों कहा जाता है कि पुरी से लौटते समय यह प्रसाद साथ जरूर लाना चाहिए?
मान्यता है कि जो श्रद्धालु जगन्नाथ पुरी की यात्रा पर जाए, उसे प्रसाद के साथ यह पवित्र बेंत भी घर अवश्य लाना चाहिए। मंदिर परिसर में प्रसाद की डलिया के साथ इसे प्राप्त किया जा सकता है।
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घर के मंदिर में रखा यह पवित्र बेंत किस बात का माना जाता है प्रतीक?
धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस बेंत को घर के मंदिर में सम्मानपूर्वक रखा जाता है। पूजा के बाद परिवार के सदस्यों को इसका स्पर्श कराया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, नकारात्मकता दूर होती है और सुख-समृद्धि के मार्ग खुलते हैं।
जिस प्रकार घर में स्थापित देवी-देवताओं की श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है, उसी प्रकार इस पवित्र बेंत को भी आदरपूर्वक रखा और पूजित किया जाता है।
पुरी धाम जाएं तो इस अनोखी परंपरा का अनुभव करना न भूलें
यदि आप भी भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पुरी धाम जाने की योजना बना रहे हैं, तो वहां की इस अद्भुत परंपरा के बारे में जरूर जानें। श्रद्धा और विश्वास के साथ ‘बेंत प्रसाद’ का आशीर्वाद ग्रहण करें और चाहें तो अपने घर के मंदिर के लिए भी इसे साथ लेकर आएं। इससे जुड़ी मान्यताएं आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
