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Lord Jagannath Mystery: न पलकें, न कान, अधूरे हाथ… आखिर क्यों ऐसा है भगवान जगन्नाथ का स्वरूप

Puri Rath Yatra: पुरी का जगन्नाथ मंदिर अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए है। पुरी मंदिर में विराजमान भगवान जगन्नाथ की मूर्ति भी इस धाम के अनसुलझे रहस्यों में से एक है।

  • Written By: रीता राय सागर
Updated On: Jun 30, 2026 | 09:50 AM

प्रभु जगन्नाथ (फोटो.सोशल मीडिया)

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Mythological story of Lord Jagannath idol: भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा प्रतिवर्ष आषाढ शुक्ल द्वितीया को प्रारंभ होती है। पद्मपुराण के अनुसार आषाढ माह के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि सभी कार्यों को करने के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

चार पवित्र धामों में से एक श्री जगन्नाथ धाम में भगवान विष्णु जगन्नाथ के रूप में विराजते हैं। मान्यता है कि यहां बाकी के तीनों धाम जाने के बाद अंत में जाना चाहिए। जगन्नाथ पुरी को धरती का बैकुंठ कहा गया है, इस स्थान को शाकक्षेत्र, नीलांचल और नीलगिरि भी कहते हैं। पुराणों के अनुसार जगन्नाथ पुरी में श्रीकृष्ण नीलमाधव के रूप में अवतरित हुए।

क्या है प्रभु जगन्नाथ की अधूरी मूर्ति का रहस्य

शास्त्रों के अनुसार दुनिया के सबसे बड़े वास्तु शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा जब मूर्ति का निर्माण कर रहे थे, तब उन्होंने यहां के राजा इंद्रदयुम्न के सामने शर्त रखी कि वे दरवाजा बंद करके मूर्ति बनाएंगे और जब तक मूर्तियां नहीं बन जाती तब तक अंदर कोई प्रवेश नहीं करेगा।

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यदि दरवाजा किसी भी कारण से मूर्ति के बनने से पहले खुल गया तो वे मूर्ति बनाना छोड़ देंगे। बंद दरवाजे के अंदर मूर्ति निर्माण का काम हो रहा है या नहीं, यह जानने के लिए राजा नित्यप्रति दरवाजे के बाहर खड़े होकर मूर्ति बनने की आवाज सुनते थे। एक दिन राजा को अंदर से कोई आवाज सुनाई नहीं दी, उनको लगा कि विश्वकर्मा काम छोड़कर चले गए हैं और तभी राजा ने दरवाजा खोल दिया और शर्त के अनुसार विश्वकर्मा वहां से अंतर्ध्यान हो गए।

इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां अधूरी ही रह गईं। उसी दिन से आज तक मूर्तियां इसी रूप में यहां विराजमान हैं और आज भी भगवान की पूजा इसी रूप में की जाती है।

ये भी पढ़ें- Deva Snana Purnima: देव स्नान पूर्णिमा पर 108 कलशों से स्नान का महत्व, क्यों हो जाते हैं प्रभु जगन्नाथ बीमार

आखिर क्यों नहीं है प्रभु के हाथ और पैर?

भगवान जगन्नाथ का अधूरा रूप गहरा आध्यात्मिक ज्ञान देता है। यह हमें सिखाता है कि ईश्वर को किसी इंसान जैसे रूप में पूरी तरह नहीं बांधा जा सकता। ईश्वर सभी भौतिक सीमाओं से परे हैं। हाथ और पैर न होने का मतलब है कि भगवान अपने भक्तों की भक्ति और विश्वास के जरिए चलते हैं।

प्रभु जगन्नाथ की बड़ी, गोल आँखें सिर्फ कलात्मक पसंद नहीं हैं। वे भगवान की निरंतर निगरानी और सुरक्षा का प्रतीक हैं। वे दिन-रात अपने सभी भक्तों पर नजर रखते हैं और उनकी भलाई का ध्यान रखते हैं। दर्शन के दौरान उन आँखों को देखकर ही कई भक्तों को प्रभु से गहरा जुड़ाव महसूस होता है।

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Published On: Jun 30, 2026 | 09:50 AM

Topics:  

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  • Jagannath Puri Temple Mystery
  • Jagannath Temple
  • Religion News
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