
Shurpanakha Aur Mata Sita Ki Mulakat (Source. AI)
Shurpanakha Aur Mata Sita Ki Mulakat: रामायण केवल युद्ध और वीरता की गाथा नहीं है, बल्कि इसमें मानवीय भावनाओं, धैर्य और करुणा की कई गहरी कहानियां भी छिपी हैं। ऐसी ही एक कम चर्चित कथा शूर्पणखा और माता सीता से जुड़ी है, जो राम-रावण युद्ध की पृष्ठभूमि को और भी स्पष्ट करती है।
रामायण में शूर्पणखा का चरित्र बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वह लंकापति रावण की इकलौती बहन थी और अपने उग्र स्वभाव के लिए जानी जाती थी। वनवास के दौरान उसका सामना भगवान राम और लक्ष्मण से हुआ, जिसने आगे चलकर पूरे युद्ध की दिशा तय कर दी।
पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, रामायण के महायुद्ध की एक बड़ी वजह शूर्पणखा ही थी। राम से विवाह की इच्छा और अस्वीकृति के बाद उसने लक्ष्मण पर आक्रमण करने की कोशिश की, जिसके परिणामस्वरूप लक्ष्मण जी ने उसकी नाक काट दी। यही अपमान रावण के मन में बदले की आग बनकर भड़का और अंततः माता सीता के अपहरण का कारण बना।
वनवास के दौरान शूर्पणखा ने पहले राम और फिर लक्ष्मण से विवाह का प्रस्ताव रखा। जब दोनों ने उसे अस्वीकार किया, तो क्रोध में आकर वह माता सीता पर झपट पड़ी। तब लक्ष्मण जी ने उसकी नाक काट दी। इसके बाद शूर्पणखा रोती-बिलखती लंका पहुंची और रावण को पूरे अपमान की कथा सुनाई।
कथाओं के अनुसार, जब शूर्पणखा को यह ज्ञात हुआ कि भगवान राम ने माता सीता को त्याग दिया है, तो वह “जले पर नमक छिड़कने” के इरादे से जंगल पहुंची। उसका उद्देश्य सीता के मन में पीड़ा और आक्रोश बढ़ाना था।
शूर्पणखा ने सीता से कहा कि “दशरथ पुत्रों की वजह से मुझे भी कष्ट सहना पड़ा और अब तुम भी राम की वजह से दुख झेल रही हो।” वह चाहती थी कि सीता राम के प्रति कटुता महसूस करें।
लेकिन माता सीता तनिक भी विचलित नहीं हुईं। उन्होंने शूर्पणखा की बातों को मुस्कान के साथ सुना और उन्हें प्रेमपूर्वक बेर खाने को दिए। सीता ने कहा, “हमें किसी से उतनी ही प्रेम की अपेक्षा रखनी चाहिए, जितना हम स्वयं कर सकते हैं।”
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माता सीता ने शूर्पणखा को सलाह दी कि वह पुरानी बातों को भूलकर अपने जीवन में आगे बढ़े। सीता की करुणा और विवेक से शूर्पणखा निरुत्तर हो गई और वहां से लौट गई।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं।






