

Life Changing Satsang By Shri Premanand Ji Maharaj: मानव जीवन ईश्वर का दिया हुआ एक दुर्लभ उपहार है। यह शरीर केवल एक उद्देश्य के लिए मिला है नाम का व्यापार करने के लिए। लेकिन माया का खेल इतना गहरा है कि हम उस धन के प्रति उदासीन बने रहते हैं, जो मृत्यु के बाद हमारे साथ जाने वाला है, और उन सांसारिक वस्तुओं से गहरा लगाव रखते हैं जिन्हें यहीं छोड़कर जाना है। एक व्यापारी सौ रुपये का नुकसान भी बर्दाश्त नहीं करता, लेकिन हम बिना 'नाम' के पूरी जिंदगी गंवा देते हैं और दुखी तक नहीं होते। यही बताता है कि हमने अभी नाम का असली मूल्य नहीं समझा।
यह संसार एक लंबा सपना है। जैसे सपने में हो रहे कष्ट का इलाज दवा से नहीं, बल्कि जागने से होता है, वैसे ही जीवन के दुख भौतिक साधनों से नहीं, बल्कि आत्मबोध से मिटते हैं। हम स्वयं ही इस जाल में फंसे तोते की तरह हैं। जो कल था, वह आज नहीं है और जो आज है, वह कल नहीं रहेगा। लोग बैंक बैलेंस जोड़ते-जोड़ते मर जाते हैं और अंतिम स्मृति धन की होती है, प्रभु की नहीं यही सबसे बड़ा भ्रम है।
माया के इस सागर को पार करने के लिए कुछ गुणों का विकास आवश्यक है। संतों के उपदेशों से निकले ये सूत्र जीवन को नई दिशा देते हैं।
यदि ये सब कठिन लगें, तो बस एक मंत्र पकड़ लें "राधा राधा राधा"। निरंतर नाम जप से ये सभी गुण स्वतः प्रकट हो जाते हैं। नाम की पूंजी को सांसारिक समस्याओं में खर्च न करें, इसे अंतिम यात्रा के लिए बचाकर रखें।
जीवन एक रेलवे स्टेशन जैसा है। कुछ देर के लिए लोग मिलते हैं, चाय पीते हैं, अपनापन लगता है, फिर उनकी ट्रेन आ जाती है और वे चले जाते हैं। हम रोते रह जाते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि हम सभी यात्री हैं। हमारा एकमात्र स्थायी संबंध केवल ईश्वर से है।