जीवन बदल देने वाली 20 बातें: श्री प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग से सीखें नाम का दिव्य व्यापार

Shri Premanand Ji Maharaj: मानव जीवन ईश्वर का दिया हुआ एक दुर्लभ उपहार है। यह शरीर केवल एक उद्देश्य के लिए मिला है नाम का व्यापार करने के लिए। लेकिन माया का खेल इतना गहरा है।
20 life-changing lessons: Learn the divine business of chanting the Lord's name from the satsang of Shri Premanand Ji Maharaj.
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Life Changing Satsang By Shri Premanand Ji Maharaj: मानव जीवन ईश्वर का दिया हुआ एक दुर्लभ उपहार है। यह शरीर केवल एक उद्देश्य के लिए मिला है नाम का व्यापार करने के लिए। लेकिन माया का खेल इतना गहरा है कि हम उस धन के प्रति उदासीन बने रहते हैं, जो मृत्यु के बाद हमारे साथ जाने वाला है, और उन सांसारिक वस्तुओं से गहरा लगाव रखते हैं जिन्हें यहीं छोड़कर जाना है। एक व्यापारी सौ रुपये का नुकसान भी बर्दाश्त नहीं करता, लेकिन हम बिना 'नाम' के पूरी जिंदगी गंवा देते हैं और दुखी तक नहीं होते। यही बताता है कि हमने अभी नाम का असली मूल्य नहीं समझा।

माया का भ्रम और संसार की सच्चाई

यह संसार एक लंबा सपना है। जैसे सपने में हो रहे कष्ट का इलाज दवा से नहीं, बल्कि जागने से होता है, वैसे ही जीवन के दुख भौतिक साधनों से नहीं, बल्कि आत्मबोध से मिटते हैं। हम स्वयं ही इस जाल में फंसे तोते की तरह हैं। जो कल था, वह आज नहीं है और जो आज है, वह कल नहीं रहेगा। लोग बैंक बैलेंस जोड़ते-जोड़ते मर जाते हैं और अंतिम स्मृति धन की होती है, प्रभु की नहीं यही सबसे बड़ा भ्रम है।

भक्तिमय जीवन के 20 स्तंभ

माया के इस सागर को पार करने के लिए कुछ गुणों का विकास आवश्यक है। संतों के उपदेशों से निकले ये सूत्र जीवन को नई दिशा देते हैं।

  • नाम से सहज प्रेम: 'राधा राधा' का नाम ऐसा हो कि बिना प्रयास के हृदय में जलता रहे।
  • वाणी पर संयम: निंदा, कटु वचन और अपशब्द भजन को नष्ट कर देते हैं।
  • सुख-दुख में समता: अत्यधिक हर्ष और शोक दोनों ही 'नाम' को छीन लेते हैं।
  • सेवा का भाव: पीड़ित मनुष्य, पशु या पक्षी की सहायता करना स्वयं भगवान की सेवा है।
  • सांसारिक शोर से दूरी: समाचार, राजनीति और अनावश्यक चर्चाएं मन को बांध लेती हैं।
  • आहार की शुद्धता: भोजन हित, मित, पथ्य और मेध्य होना चाहिए।
  • नम्रता और गुरु-कृपा: अपने गुणों पर गर्व न करें, सब कुछ गुरु की कृपा मानें।
  • बाहरी दिखावे से बचाव: असली सौंदर्य नाम और ब्रह्मचर्य से आता है।

एक ही शरण काफी है

यदि ये सब कठिन लगें, तो बस एक मंत्र पकड़ लें "राधा राधा राधा"। निरंतर नाम जप से ये सभी गुण स्वतः प्रकट हो जाते हैं। नाम की पूंजी को सांसारिक समस्याओं में खर्च न करें, इसे अंतिम यात्रा के लिए बचाकर रखें।

जीवन की एक सरल उपमा

जीवन एक रेलवे स्टेशन जैसा है। कुछ देर के लिए लोग मिलते हैं, चाय पीते हैं, अपनापन लगता है, फिर उनकी ट्रेन आ जाती है और वे चले जाते हैं। हम रोते रह जाते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि हम सभी यात्री हैं। हमारा एकमात्र स्थायी संबंध केवल ईश्वर से है।

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