‘देवउठनी एकादशी’ के दिन क्या न खाएं, जानिए विधिवत पूजा के पुण्य-प्रताप की महिमा
Ekadashi 2025: कल 1 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाई जा रही हैं। इस एकादशी को हिन्दू धर्म की सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती हैं। इस कठोर व्रत को लेकर कई सारे नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन बहुत जरूरी है।
- Written By: सीमा कुमारी
देवउठनी एकादशी व्रत में क्या खाएं (सौ.सोशल मीडिया)
Devuthani Ekadashi 2025 Fast Rituals: देवउठनी एकादशी का व्रत हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस बार यह व्रत शनिवार, 1 नवंबर को मनाई जा रही है।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जाकर फिर से सृष्टि के कार्यों का संचालन करते हैं। इस पवित्र तिथि से सभी शुभ एवं मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी की जाती है।
सनातन धर्म देवउठनी एकादशी का बड़ा व्रत है। कहा जाता है कि,इस व्रत को करने से हजार यज्ञों और हवनों के सामान फल मिलता है। ऐसे में अगर आप भी इस व्रत को करने के लिए सोंच रहे है तो इस दौरान खान-पान के मामले में थोड़ी सावधानी रखनी होती है, तो आइए इस आर्टिकल में व्रत के सही नियमों को जानते हैं।
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देवउठनी एकादशी व्रत में क्या खाएं?
फल और मेवे – इस व्रत में सभी प्रकार के फल और सूखे मेवे का सेवन किया जा सकता है। इस दिन आलू, शकरकंद, अरबी, और साबूदाना खाया जा सकता है।
कुट्टू और सिंघाड़े का आटा –
इस तिथि पर सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, और राजगीरे के आटे से बनी पूड़ी, पराठा या पकौड़ी खा सकते हैं।
डेयरी की चीजें –
इस मौके पर दूध, दही, छाछ, पनीर और घी का सेवन किया जा सकता है।
नमक और मसाले –
इस दिन केवल सेंधा नमक और काली मिर्च, हरी मिर्च, अदरक, जीरा पाउडर आदि सात्विक मसालों का प्रयोग कर सकते हैं।
देवउठनी एकादशी व्रत में क्या नहीं खाएं?
अनाज –
इस दिन चावल, गेहूं, जौ, बाजरा, मक्का और सभी प्रकार की दालों का सेवन वर्जित है।
तामसिक भोजन –
इस दिन लहसुन, प्याज, मांस, मछली, और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
साधारण नमक –
व्रत में सामान्य नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
इस दिन गोभी, गाजर, पालक, बैंगन और शलजम जैसी सब्जियां भी नहीं खानी चाहिए।
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देवउठनी एकादशी व्रत के दिन करें इन नियमों का पालन
- स्नान के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- इस दिन मन, वचन और कर्म से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
- एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।
- अगर भोग के लिए तुलसी दल की जरूरत हो, तो उसे एक दिन पहले ही तोड़ कर रख लें।
- इस तिथि पर किसी की निंदा न करें, झूठ न बोलें और किसी से वाद-विवाद न करें।
- एकादशी के दिन सोना वर्जित माना गया है।
- ऐसे में इस मौके पर भजन-कीर्तन करें।
- व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि को शुभ मुहूर्त में ही करें।
- पारण के प्रसाद में चावल और तामसिक चीजों को शामिल न करें।
