यहां ब्रम्हचारिणी के रूप में होती है मां विंध्यवासिनी की पूजा, पूरे साल लगता है भक्तों का तांता

आज नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रम्हचारिणी के लिए समर्पित होता है। वैसे तो माता के सभी मंदिरों में भक्तों की भीड़ नजर आती है लेकिन मिर्जापुर जनपद में स्थित विंध्यांचल मंदिर में विराजित मां विंध्यवासिनी माता की ब्रम्हचारिणी के रूप में पूजा की जाती है।
विंध्यवासिनी धाम, ब्रम्हचारिणी माता
विंध्यवासिनी धाम (सौ.सोशल मीडिया)
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Shardiya Navratri 2024: जैसा कि, शारदीय नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार के दिन से हो गई हैं वहीं पर आज नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रम्हचारिणी के लिए समर्पित होता है। वैसे तो माता के सभी मंदिरों में भक्तों की भीड़ नजर आती है लेकिन मिर्जापुर जनपद में स्थित विंध्यांचल मंदिर में विराजित मां विंध्यवासिनी माता की ब्रम्हचारिणी के रूप में पूजा की जाती है। इस मंदिर में काफी मान्यता छिपी हैं इसके बारे में कम ही लोग जानते होंगे।

जानिए विंध्याचल मंदिर की खासियत

माता का दूसरा स्वरुप ब्रम्हचारिणी यहां पर मां विंध्यवासिनी के रूप में बसा हुआ है। यहां पर विंध्याचल धाम में विंध्य पर्वत व पतित पावनी मां भागीरथी के संगम तट पर विराजित माता ब्रम्हचारिणी की पूजा की जाती है। मान्यता हैं कि, जो भी भक्त माता के दरबार में आता है भगवान उसकी सभी परेशानियां दूर कर लेते है। इस मंदिर में आने वाले भक्त सफेद कपड़ों में पहुंचते है। इसे लेकर कहा जाता हैं कि, माता विंध्यवासिनी माता की पूजा के लिए सफेद कपड़े पहनना जरुरी होता है। इतना ही नहीं इस मंदिर में माता को सफेद चीजों का भोग लगाया जाता है।

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मंदिर में हर समय पहुंचते हैं भक्त

इस मंदिर में भक्तों का तांता पूरे मौसम में लगा रहता हैं लेकिन नवरात्रि में माता का दरबार बेहद शानदार सजा होता है। इस समय बड़ी संख्या में भक्त माता के आशीर्वाद के लिए पहुंचते है। इस मंदिर में मां विंध्यवासिनी माता के दर्शन करने के बाद त्रिकोण पथ की यात्रा करने की बात कही जाती है दरअसल यह पथ तीन देवियों, मां अष्टभुजी, मां काली और शीतला देवी के दर्शन के लिए जाना जाता है। कहा जाता है कि, माता विंध्यवासिनी की पूजा और दर्शन करने मात्र से व्यक्ति के शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।

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