वैशाख माह (सौ. AI)
Vaishakh Maas Daan Mahatva:आज 3 अप्रैल से हिन्दू नववर्ष का दूसरा महीना वैशाख महीने की शुरुआत हो गई है। हिन्दू धर्म में यह महीना जगत के संचालनकर्ता भगवान विष्णु को समर्पित बताया गया है।इसलिए इस महीने को सनातन धर्म में बेहद पवित्र और शुभ माना जाता है।
धार्मिक ग्रथों में बताया गया है कि,वैशाख महीने में भगवान विष्णु ने मधु नाम के राक्षस का वध किया था। इसलिए इसे माधव मास भी कहा जाता है। इस महीने में भगवान विष्णु के मधुसूदन स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है।
स्कंद पुराण के अनुसार वैशाख माह में किया गया दान अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस समय दान करने से कई गुना फल मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
स्कंद पुराण में बताया गया है कि, वैशाख माह के जैसा दूसरा कोई उत्तम एवं शुभ माह नहीं है। इस महीने में तुलसी पूजन के अलावा स्नान, दान का बड़ा महत्व होता है। स्कंद पुराण के अनुसार वैशाख माह में किया गया दान अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस समय दान करने से कई गुना फल मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
स्कंद पुराण के अनुसार, वैशाख माह में जल दान सबसे श्रेष्ठ माना गया है। कहा गया है कि जितना पुण्य सभी दानों और तीर्थों के दर्शन से मिलता है, उतना फल इस माह में केवल जल दान से ही प्राप्त हो जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, इस माह में जल का अर्घ्य अर्पित करने से सूर्य देव बहुत प्रसन्न होते हैं। वैशाख में जल से भरा घड़ा यानी मटके का दान जरुर करना चाहिए।
वैशाख महीने में जल दान के अलावा, पंखा का दान करना भी शुभ बताया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति धूप और थकान से पीड़ित लोगों को पंखे से शीतलता देता है, वह पापों से मुक्त होकर भगवान का प्रिय बनता है। इस माह में ताड़ का पंखा दान करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
वैशाख महीने में फलों का दान करना भी शुभ बताया गया है। इसलिए इस महीने में मौसमी फल जैसे- तरबूज, खरबूजा और बेल का दान जरुर करना चाहिए। शास्त्रों में फल का दान करने से घर में सुख-समृद्धि और बरकत आती है।
वैशाख महीने में फलों के दान के अलावा सत्तू का दान अवश्य करना चाहिए। इसके सेवन से पेट ठंडा रहता है और मौसमी बीमारियों से बचाव भी होता है। इसलिए इस माह में सत्तू का सेवन जरूर करें। साथ ही सत्तू का दान भी अवश्य करें।
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शास्त्र कहते हैं कि जो विष्णुप्रिय वैशाख मास में किसी जरूरतमंद व्यक्ति को पादुका या जूते-चप्पल दान करता हैं,वह यमदूतों का तिरिस्कार करके भगवान श्री हरि के लोक में जाता है।
निद्रा से दुःख का नाश होता है निद्रा से थकावट दूर होती है इसलिए जो मनुष्य तिनके या खजूर आदि के पत्तों से बनी हुई चटाई दान करता है,उसके सारे दुखों का नाश हो जाता है और परलोक में उत्तम गति को पाता है।