साल की आखिरी पूर्णिमा आज, इस दिन घर में भूलकर भी न करें ये 5 काम,वरना माता लक्ष्मी हो जाएंगी नाराज
Margashirsha Purnima Muhurat: मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन गंगा समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान-दान और पूजा-पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
मार्गशीर्ष पूर्णिमा का धार्मिक महत्व (सौ.सोशल मीडिया)
Margashirsha Purnima 2025: आज 4 दिसंबर को साल की आखिरी पूर्णिमा मनाई जा रही है। इसके बाद पौष का महीना शुरू हो जाएगा। ज्योतिषविदों की मानें तो, मार्गशीर्ष पूर्णिमा सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन गंगा समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान-दान और पूजा-पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
आपको बता दें, इस वर्ष, पंचांग के अनुसार, यह तिथि 4 दिसंबर को सुबह 8:36 बजे शुरू होकर 5 दिसंबर की सुबह 4:42 मिनट तक रहेंगी। इसलिए उदया तिथि के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा 4 दिसंबर दिन गुरुवार को मनाई जाएगी।
दान-स्नान और पूजा का मुहूर्त
मार्गशीर्ष पूर्णिमा यानी 4 दिसंबर की सुबह 4:19 बजे से सुबह 4:58 बजे ब्रह्म मुहूर्त रहेगा। इस शुभ घड़ी में आप किसी पवित्र घाट पर जाकर स्नान कर सकते हैं। आप चाहें तो घर में ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं और अपने सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा कर सकते हैं।
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ये है पूजा का मुहूर्त
मार्गशीर्ष पूर्णिमा सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। यदि आप दोपहर के समय पूजा-पाठ या कोई धार्मिक अनुष्ठान करना चाहते हैं, तो इस शुभ मुहूर्त में कर सकते हैं। कहते हैं कि इस शुभ घड़ी में किए गए कार्यों के सफल होने की संभावना अत्यधिक होती है। आप दान आदि से जुड़े कार्य भी इस मुहूर्त में कर सकते हैं।
क्या है मार्गशीर्ष पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में मार्गशीर्ष पूर्णिमा अत्यंत पवित्र मानी जाती है। शास्त्रों में इस पूर्णिमा को धन, सौभाग्य, पितृ-शांति और भगवान नारायण की विशेष कृपा पाने वाली कहा जाता है। गीता में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि- ‘मासानां मार्गशीर्षोऽयम्’ अर्थात् मासों में मैं मार्गशीर्ष हूं।
वैसे तो किसी भी पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा का महत्व है लेकिन मार्गशीर्ष के दौरान भगवान विष्णु के कृष्ण स्वरूप की पूजा का अधिक महत्व है। ऐसे में मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के साथ ही उनके स्वरूप भगवान श्री कृष्ण की भी उपासना करनी चाहिए। इसके अलावा आज मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव की उपासना का भी महत्व है। कहते हैं इस दिन चंद्रदेव अमृत से परिपूर्ण हुए थे।
पूर्णिमा के दिन गंगा या अन्य किसी पवित्र नदियों में स्नान-दान करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा के दिन किए गए दान-पुण्य का व्यक्ति को 32 गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
ऐसे में अगर आप भी पुण्यकारी फलों की प्राप्त करना चाहते हैं तो पूर्णिमा के दिन अपनी क्षमतानुसार कुछ न कुछ जरूर दान करें। इसके अलावा पूर्णिमा के दिन कुछ कार्यों को गलती से भी नहीं करना चाहिए वरना आपका जीवन परेशानियों से घिर सकता है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर इन नियमों का करें पालन
ज्योतिष धर्म गुरु के अनुसार, पूर्णिमा के दिन बाल, दाढ़ी और नाखून नहीं काटना चाहिए। पूर्णिमा के दिन ऐसा करने से घर में दरिद्रता आती है।
पूर्णिमा के दिन सुबह देर तक सोने से बचना चाहिए। अगर संभव हो तो इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और फिर पूजा पाठ करें।
अगहन पूर्णिमा के दिन तामसिक भोजन जैसे- मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन का सेवन बिल्कुल भी न करें। साथ शराब और अन्य नशीले पदार्थों से भी दूर रहे।
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पूर्णिमा के दिन किसी भी गरीब दरवाजे पर आए जरूरतमंद का अपमान न करें। वरना मां लक्ष्मी आपसे नाराज हो सकती हैं।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन काले रंग के कपड़े बिल्कुल भी न पहनें। वरना आपके जीवन में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव अधिक हो जाएगा।
