‘तिल द्वादशी’ का व्रत क्यों किया जाता है? किस वस्तु के दान से मिलेगा अश्वमेध यज्ञ बराबर पुण्य फल? जानिए
Lord Vishnu Til Dwadashi : तिल द्वादशी व्रत जानिए क्यों मनाया जाता है, तिल दान से कैसे मिलेगा अश्वमेध यज्ञ जितना पुण्य, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत के लाभ।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान विष्णु (सौ.सोशल मीडिया)
Til Dwadashi Vrat: तिल द्वादशी का व्रत हर साल षटतिला एकादशी के अगले दिन मनाई जाती है। इस बार यह द्वादशी 15 जनवरी, गुरुवार को मनाई जाएगी। इसे कूर्म द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई है, इसलिए यह उन्हें अत्यंत प्रिय है।
महाभारत में उल्लेख है कि इस दिन श्री हरी भगवान विष्णु की पूजा और तिल के दान का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन तिल से स्नान, तिल का दान, तिल से हवन तथा तिल युक्त भोजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान श्रीहरि नारायण की कृपा प्राप्त होती है।
तिल द्वादशी 2026: तिथि और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 2026 में तिल या कूर्म द्वादशी 15 जनवरी, गुरुवार को मनाई जाएगी।
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माघ कृष्ण द्वादशी तिथि आरंभ: 14 जनवरी 2026 को शाम 05:52 बजे से।
द्वादशी तिथि समाप्त: 15 जनवरी 2026 को रात 08:16 बजे तक।
तिल द्वादशी व्रत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
सनातन धर्म में तिल द्वादशी व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु (नारायण) को समर्पित होता है और विशेष रूप से तिल दान के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किया गया तिल दान अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्रदान करता है।
तिल द्वादशी व्रत क्यों किया जाता है?
भविष्य पुराण और अन्य धर्मशास्त्रों में उल्लेख है कि तिल द्वादशी का व्रत करने से व्यक्ति को कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है जो इस प्रकार है-
- गंभीर रोगों से मुक्ति
- पितृ दोष से मुक्ति
- आयु, स्वास्थ्य और सौभाग्य में वृद्धि करता है
- मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है
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कैसे करें तिल द्वादशी की पूजा
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर तिल मिले जल से स्नान करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- पंचामृत, तिल, पुष्प, धूप और दीप से पूजा करें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- तिल से बने व्यंजन जैसे तिल लड्डू, तिल की चिक्की आदि का दान करें।
- दिन में एक समय सात्विक भोजन या फलाहार करें।
