ईद-ए-मिलाद-उन-नबी की ये है सही तारीख़, जानिए इस त्योहार से जुड़ी क्या है मान्यता
Eid E Milad 2025: ईद-ए मिलाद उन नबी हर साल इस्लामिक कैलेंडर के तीसरे महीने ‘रबी-उल-अव्वल’ की 12वीं तारीख को मनाई जाती हैं। आइए जानते हैं ईद-ए-मिलाद कब है और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।
- Written By: सीमा कुमारी
कब है ईद-ए-मिलाद-उन-नबी (सौ.सोशल मीडिया)
Eid E Milad 2025: ईद-ए-मिलाद मुस्लिम समुदाय का मुख्य पर्व हैं। यह पर्व मुस्लिम समुदाय के लोग पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाते हैं। इसे मुहम्मद का जन्मदिन, नबी दिवस या मौलिद के नाम से भी जाना जाता है। दुनिया भर के मुसलमान इस त्यौहार को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।
इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, रबी-उल-अव्वल महीने की 12वीं तारीख को ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मनाई जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं ईद-ए-मिलाद कब है और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें –
कब है ईद-ए-मिलाद-उन-नबी
इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मनाए जाने की सटीक तारीख चांद के दिखने पर निर्भर करती है। ऐसे में 4 या 5 सितंबर को ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मनाए जाने की उम्मीद है।
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क्यों मनाई जाती है ईद-ए-मिलाद-उन-नबी
इस्लाम धर्म की मान्यताओं के अनुसार, पैगंबर मोहम्मद का जन्म मक्का में हुआ था। माना जाता है कि हजरत मोहम्मद का जन्म उन्हें समाज में फैल रहे अंधकार को दूर करने व बुराइयों को खत्म करने के लिए हुआ था।
ऐसा माना जाता है कि पैगंबर मोहम्मद का जन्म लगभग 570 ईस्वी में मक्का में हुआ था। उनका जन्म रबी-उल-अव्वल महीने की 12 तारीख पर मिलादुन्नबी के दिन हुआ था।
इसलिए इस दिन को ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के रूप में मनाए जाने की परम्परा है। वहीं यह भी माना जाता है कि रबी-उल-अव्वल महीने की 12वें दिन ही पैगंबर मोहम्मद का इंतकाल भी हुआ था। इसलिए कुछ लोग इसे शोक के रूप में भी मनाते हैं।
कैसे मनाया जाता है ईद-ए-मिलाद:
नए कपड़े और प्रार्थना
लोग नए कपड़े पहनते हैं और विशेष प्रार्थनाएं (नमाज़) करते हैं। मस्जिदों और दरगाहों पर लोग इकट्ठा होते हैं और दिन की शुरुआत सुबह की नमाज़ से होती है।
जुलूस और सभाएं
कई शहरों में इस दिन बड़े बड़े जुलूस निकाले जाते हैं। इन जुलूसों में लोग पैगंबर मुहम्मद के जीवन और उनकी शिक्षाओं को याद करते हैं।
बच्चों के लिए कहानियां
बच्चों को पैगंबर मुहम्मद के जीवन से जुड़ी कहानियां और कुरान की शिक्षाएं सुनाई जाती हैं।
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दान पुण्य और भोज
इस दिन ज़रूरतमंदों को दान दिया जाता है। साथ ही, सार्वजनिक भोज (खाना पीना) का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें लोग मिलकर खाना खाते हैं।
