माघ मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत एक साथ पड़ने की क्या है महिमा? क्यों है शिव पूजा का यह दुर्लभ संयोग?

Pradosh Kaal Significance: माघ मास में जब मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत एक ही दिन पड़ते हैं, तो यह भगवान शिव की पूजा का दुर्लभ और अत्यंत शुभ संयोग माना जाता है।
Magh Masik Shivratri 2026
भगवान शिव(सौ.सोशल मीडिया)
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Magh Masik Shivratri 2026: शिवभक्तों के लिए मासिक शिवरात्रि का व्रत बड़ा महत्व रखता है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को 'मासिक शिवरात्रि' का व्रत रखा जाता है। इस बार साल 2026 की पहली मासिक शिवरात्रि 16 जनवरी 2026 को है। इस दिन प्रदोष व्रत का संयोग भी बन रहा है। जिसके कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

लोक मान्यता के अनुसार,इस दिन शिव भक्त सच्चे मन से भोलेनाथ की पूजा अर्चना करते हैं और उपवास रखते हैं। मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से भक्तों की सभी बाधाएं दूर होती हैं और आप पर भोलेनाथ की कृपा बनी रहती है। ऐसे में आइए जान लें माघ मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत की सही डेट और इससे जुड़े तमान बातें-

माघ मासिक शिवरात्रि 2026 क्या है मुहूर्त

  • मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का मुहूर्त 16 जनवरी 2026 को रात 10 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 18 जनवरी 2026 को सुबह 12 बजकर 03 मिनट पर समाप्त होगी।
  • शिव पूजन का मुहूर्त – 17 जनवरी को देर रात 12.04 – देर रात 12.58

क्या है मासिक शिवरात्रि के लिए पूजा सामग्री

मासिक शिवरात्रि पर पूजा शुरू करने से पहले दूध, पानी और गंगाजल के साथ रौली-मौली, दूध, दही, घी, बेलपत्र, धतूरा, तिल, हलवा, खीर का भोग लगाएं।

मासिक शिवरात्रि का व्रत कैसे करें

शिव भक्तों के लिए मासिक शिवरात्रि का व्रत खास महत्व रखता है। शिवरात्रि के एक दिन पहले, मतलब त्रयोदशी तिथि के दिन, भक्तों को केवल एक समय ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। शिवरात्रि के दिन, सुबह नित्य कर्म करने के बाद भक्त गणों को पूरे दिन के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। शिवरात्रि के दिन भक्तों को सन्ध्याकाल स्नान करने के पश्चात् ही पूजा करना चाहिए या मन्दिर जाना चाहिए।

भगवान शिव की पूजा रात के समय करना चाहिए और अगले दिन स्नानादि के पश्चात् अपना व्रत का पारण करना चाहिए। शिव जी की पूजा के समय भक्तों को सफेद रंग के वस्त्र पहनना चाहिए। साथ ही वैवाहिक जीवन में हैं तो पत्नी या पति संग पूजन करें।

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