
शमी का पौधा (सौ.सोशल मीडिया)
Shami Plant Benefits: जिस प्रकार हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे का आध्यात्मिक महत्व है, ठीक उसी प्रकार शमी का पौधा भी सनातन धर्म में खास स्थान रखता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, शमी का पौधा न्याय के देवता शनिदेव को अति प्रिय है। कहते हैं कि शनिदेव को शमी के पत्ते अर्पित करने से व्यक्ति की हर मनोकामना जल्दी पूरी होती है।
साथ ही सुख और सौभाग्य में भी बढ़ती होती है। इसके अलावा, करियर और कारोबार से जुड़े समस्या से भी निजात मिलता है। यही कारण है कि शनिवार के दिन शमी की पूजा विशेष रूप से की जाती है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवों के देव महादेव को शमी के पत्ते अर्पित करने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं। यही नहीं, शमी के पत्ते भगवान गणेश को भी अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि घर में शमी का पौधा लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में शांति, सुख और समृद्धि बनी रहती है।
शमी का पौधा लगाने के लिए शनिवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा मौनी अमावस्या, शनि अमावस्या, दशहरा और शनि प्रदोष व्रत के दिन शमी का पौधा लगाना विशेष फलदायी होता है। पौधा लगाते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए और मन में श्रद्धा व सकारात्मक भाव रखें।
वास्तु शास्त्र के अनुसार शमी का पौधा घर की दक्षिण दिशा या पश्चिम दिशा में लगाना सबसे शुभ माना जाता है। ऐसा करने से शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। शमी का पौधा कभी भी घर के अंदर नहीं लगाना चाहिए, बल्कि इसे खुले स्थान या आंगन में लगाना उत्तम रहता है।
सनातन धर्म में शमी की पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है। शमी के पौधे की नियमित पूजा करने से जीवन में कई सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं-
शमी शनिदेव को अत्यंत प्रिय है। इसकी पूजा से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में कमी आती है।
शमी पूजा व्यक्ति को उसके अच्छे कर्मों का फल दिलाने में सहायक मानी जाती है और जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे दूर होती हैं।
मान्यता है कि शमी की पूजा करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
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नौकरी, व्यापार और शिक्षा में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और नए अवसर प्राप्त होते हैं।
शमी का पौधा आसपास की नकारात्मक शक्तियों को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। धर्म गुरु के अनुसार, शमी की पूजा विशेष रूप से शनिवार, शनि अमावस्या, मौनी अमावस्या और दशहरा के दिन करने से इसका प्रभाव और भी अधिक बढ़ जाता है






