8 वर्षों से मिट्टी के गणेशजी बना रहे संदीप शिंदे, पंचतत्वों से भरपूर मिट्टी की प्रतिमा का पूजन शुभ
Ganeshotsav 2025: जे.जे.से संदीप ने बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स की डिग्री प्राप्त की। इसके अलावा उन्होंने आर्ट्स टीचर डिप्लोमा भी प्राप्त किया।मिट्टी की प्रतिमाओं का निर्माण करना उनका शौक है।
- Written By: आंचल लोखंडे
8 वर्षों से मिट्टी के गणेशजी बना रहे संदीप शिंदे (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Amravati News: अचलपुर के स्थानीय कांडली के हरितवाल नगर में रहते संदीप शिंदे वैसे तो एक स्थानीय स्कूल में ड्राइंग टीचर कार्यरत है, लेकिन उनमें मिट्टी को शिल्प के रूप में उकेरने का गजब का गुण भी दिखाई देता है। विरासत में मिले यही गुण संदीप को कुछ हटकर पढ़ाई करने के लिए भी प्रेरित करते रहे। यही वजह भी है कि उन्हें देश की शीर्षस्थ शिक्षा संस्थान जे.जे.स्कूल ऑफ आर्ट्स मुंबई में पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ था। जे.जे. संदीप ने बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स की डिग्री प्राप्त की।इसके अलावा उन्होंने आर्ट्स टीचर डिप्लोमा भी प्राप्त किया।मिट्टी की प्रतिमाओं का निर्माण करना उनका शौक है,पैशन है।उन्हें लगाव है कि वो मिट्टी को अलग-अलग रूप में ढालते रहे।
पढ़ाई पूरी करने के बाद में संदीप तीन वर्षों तक नागपुर में भी अपने हुनर का प्रदर्शन करते रहे लेकिन वहां भी उन्हें मिट्टी के साथ कलाकारी करने का स्वयंस्फूर्त भाव नही आया।वो परतवाड़ा लौटे।पाठकों की जानकारी के लिए बता दे कि परतवाड़ा के ख्यातनाम मूर्तिकार चौहान गुरुजी यानी ‘ सागर आर्ट्स ‘ के नाम से प्रसिद्ध वासुदेवराव चौहान यह संदीप के नानाजी है।चौहान सर स्थानीय बॉयज हाइस्कूल में बतौर टीचर कार्यरत रहे और उनकी बनाई प्रतिमाएं हर व्यक्ति के लिए खास आकर्षण बनी रहती थी।अब सर की विरासत को उन्ही के पुत्र आकाश चौहान आगे बढ़ा रहे है।आकाश यह संदीप के मामा है। वर्ष 2017 में संदीप ने सबसे पहले तिलक चौक परतवाड़ा के नामदेव गणेश मंडल के लिए मिट्टी की गणेश प्रतिमा बनाकर अपने शुभ कार्य का श्रीगणेश किया था।
मिट्टी से बनी मूर्ति की शास्त्रोक्त महिमा
बता दे कि मिट्टी की मूर्ति में पंचतत्व होते है, इसलिए पुराणों में मिट्टी की मूर्ति की पूजा करने के लिए कहा गया है।ऐसी भी मान्यता है कि मिट्टी से बने गणेश का पूजन करने से कई यज्ञों का फल प्राप्त होता है। आचार्य वराह मिहिर ने भी ‘ बृहत्संहिता ‘ नामक ग्रंथ में कहा है कि मिट्टी की प्रतिमा का पूजन शुभ है। ‘शिवपुराण’ में कहा गया है कि देवी पार्वतीजी को पुत्र प्राप्त करने की इच्छा थी तब उन्होंने मिट्टी का पुतला बनाया और उसके बाद शिवजी ने उसमे प्राण फूंक दिए थे। इस तरह गणेशजी का जन्म माना गया है। मिट्टी से बनी मूर्ति की शास्त्रोक्त महिमा है और पर्यावरण के परिप्रेक्ष्य में भी मिट्टी की मूर्ति ही बनाना उचित है।
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मूर्तियां पानी मे आसानी से मिल जाती और इससे पर्यावरण भी दूषित नही होता
संदीप कहते है कि नदी,तालाब या अन्य किसी स्वच्छ स्थल की शुद्ध मिट्टी का उपयोग कर ही वो मिट्टी की मूर्ति बनाते है।पीओपी से बनी मूर्ति सुंदर और चमकीली महसूस होती है, लेकिन मिट्टी से बनी मूर्ति विशेष पवित्र मानी जाती है।यह सकारात्मक ऊर्जा देती है।वही पीओपी की केमिकल युक्त मूर्ति विसर्जन के वक्त आसानी से पानी मे भी नही मिल पाती है।मिट्टी की मूर्तियां पानी मे आसानी से मिल जाती और इससे पर्यावरण भी दूषित नही होता।
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संदीप को मिट्टी से मूर्तियों का निर्माण करने में काफी रुचि है।उनके इस कार्य मे ‘ व्यवसायिकता ‘ को कोई स्थान नही है।वो बहुत ही कम मात्रा में और अग्रिम आदेश के बाद अपनी कला को साकार करते है। तिलक चौक के अलावा वनश्री कॉलोनी, शीतला माता मंदिर आदि स्थानों के लिए भी वो मिट्टी की प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे है।इसके अलावा घर-घर मे पूजे जाते गणेशजी के लिए भी वो एकाग्र भाव से बाल गणेश की प्रतिमाएं बनाते है। सभी श्रद्धालु भक्तो की भी यह जवाबदारी बनती है कि सभी लोग मिट्टी की प्रतिमा का ही पूजन कर पर्यावरण की समृद्धि के साथ अपनी स्वयं की आत्मिक शुद्धि के लिए भी प्रयासरत रहे।
