Sadhguru on Rudraksha: रुद्राक्ष क्यों पहनने की सलाह देते हैं सदगुरु? तनाव भरी जिंदगी में जानें इसका खास महत्व

Rudraksha Benefits: रुद्राक्ष केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि मानव शरीर के साथ एक वाइब्रेशन के जरिए जुड़ने वाला साधन है। जानें तनाव भरी जिंदगी में रुद्राक्ष पहनने को लेकर सद्गुरु की क्या राय है।
Sadhguru rudraksha significance science stress benefits
सद्गुरुफोटो.सोशल मीडिया
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Rudraksha Significance: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, मानसिक दबाव और लगातार बढ़ता वर्कलोड लाइफस्टाइल का हिस्सा बन गई है। ऐसे में आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु रुद्राक्ष को केवल आस्था से जुड़ी चीज नहीं मानते, बल्कि इसे मानव शरीर और उसकी एनर्जी से जुड़ा एक सोर्स मानते हैं।

रुद्राक्ष को लेकर क्या कहते हैं सद्गुरु?

सद्गुरु मानते हैं कि रुद्राक्ष की वाइब्रेशन नेचुरल होती है, इसका संबंध केवल विश्वास या धार्मिक आस्था से नहीं, बल्कि मानव शरीर पर पड़ने वाले इसके प्रभाव से भी है। उनके मुताबिक, लंबे समय तक रुद्राक्ष पहनने पर रुद्राक्ष व्यक्ति के शरीर के साथ सामंजस्य स्थापित कर लेता है।

क्या है रुद्राक्ष का अर्थ?

‘रुद्राक्ष’ रुद्र और अक्ष, दो शब्दों से मिलकर बना है। रुद्र का संबंध भगवान शिव से और अक्ष का अर्थ आंख से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष को भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न माना गया है। भगवान शिव लंबे समय तक ध्यान में लीन रहे। जब उनकी आंखों से आनंद के आंसू धरती पर जहां-जहां गिरे, वहां-वहां रुद्राक्ष के पेड़ की उत्पत्ति हुई।

अपना रुद्राक्ष किसी के साथ शेयर न करें

सद्गुरु के अनुसार, हर चीज की पहचान उसके वाइब्रेशन के आधार पर की जाती है। रुद्राक्ष में भी एक वाइब्रेशन है, जो सिर्फ इसे हाथ में पकड़ने से ही आप महसूस कर सकते हैं। हालांकि, अगर आपने तीन से छह महीने तक रुद्राक्ष पहना है, तो इस दौरान यह एक तरह से आपके शरीर के साथ घुल-मिल गया होगा। इसलिए हर व्यक्ति का रुद्राक्ष अलग होता है। यही कारण है कि आपको अपना रुद्राक्ष कभी किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं देना चाहिए और न ही किसी दूसरे का रुद्राक्ष पहनना चाहिए, क्योंकि वह एक खास तरह का वाइब्रेशन आपकी सोच व आपके विचारों के साथ बना लेता है और आपका कुछ अंश उसके साथ जुड़ जाता है।

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लगातार रुद्राक्ष पहनने के लाभ

सद्गुरु कहते हैं कि रुद्राक्ष को लगातार धारण करने से वो आपके शरीर का हिस्सा बन जाता है। अगर आपने एक या दो साल तक 24 घंटे रुद्राक्ष पहना है और एक दिन उसे उतारकर सोने की कोशिश करते हैं, तो आपको नींद नहीं आएगी। ऐसा महसूस होगा जैसे आपके शरीर का कोई हिस्सा गायब है, क्योंकि रुद्राक्ष आपके शरीर का हिस्सा बन चुका है और एक अंग की तरह काम करता है।

साधु-संत ही नहीं, कोई भी धारण कर सकता है

सद्गुरु का मुख्य जोर इस बात पर है कि रुद्राक्ष केवल साधु-संतों, ध्यान करने वालों या आध्यात्मिक साधकों के लिए ही नहीं है। उनका मानना है कि आधुनिक जीवन के तनाव और मानसिक दबाव से जूझने वाला कोई भी व्यक्ति इसे पहन सकता है। चाहे वर्कलोड के बोझ तले कोई नौकरीपेशा इंसान हो या फिर आप अपनी एकाग्रता बढ़ाना चाहते हैं या आप स्टूडेंट है, सद्गुरु रुद्राक्ष को एक सरल और प्रभावी सहायक साधन मानते हैं।

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