
मौनी अमावस्या पर दुर्लभ संयोग (सौ.सोशल मीडिया)
Mouni Amavasya 2025: हिंदू धर्म में हर व्रत और त्योहार का महत्व होता है इसमें ही 29 जनवरी को मौनी अमावस्या व्रत की पूजा की जाएगी। बताया जा रहा है महाकुंभ में दूसरा अमृत स्नान इस दिन ही मौनी अमावस्या के दिन हो रहा है। मौनी अमावस्या और अमृत स्नान का शुभ संयोग इस दिन बन रहा है अगर आप जीवन में सुख-समृद्धि चाहते है तो मौन साधना कर सकते है। मौन साधना इस दिन यानि मौनी अमावस्या के दिन करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। चलिए जान लेते है मौन साधना का महत्व…
आपको बताते चलें कि, मौनी अमावस्या में मौन का महत्व होता है। यहां पर मौन, केवल शब्दों का नहीं होता है मन का भी मौन होता है इसकी अभिव्यक्ति प्रियदर्शी महाराज द्वारा रचित, ग्रन्थ ‘श्रीकृष्ण चरित मानस’ (रसायन महाकाव्य) में दिया गया है। यहां पर सप्ताह में एक दिन मौन रखने की बात कही जाती है जो तनाव मुक्त रखता है। मौन व्रत से हमारा मन शांत हो जाता है, मन की एकाग्रता बढ़ती है और मनुष्य को ध्यान केंद्रित करने में आसानी होती है। जिस वजह से मनुष्य बड़ी सरलता से कठिनाइयों का सामना करता है।
यहां पर 29 जनवरी को मनाई जाने वाली मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या भी कहा जाता है। इसका कारण है यह माघ महीने में आती है इसलिए माघी अमावस्या का महत्व बताया गया है।माघ मास में आने वाली इस अमावस्या में अगर मनुष्य गंगा नदी में स्नान करता है, तो वह अपने जीवन के सारे पापों से मुक्त हो जाता है। इस अमावस्या की बात की जाए तो, अगर आप मौनी अमावस्या के दिन मनुष्य ने अगर अपने पूर्वजों की शांति पूजा और पितरों के पिंडदान का महत्व होता है इससे पितृदोष से मुक्ति मिलती है। यहां मौनी अमावस्या पर दान करने का महत्व होता है कहते है मौनी अमावस्या से बेहतर शुभ दिन कोई नहीं है।
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आपको बताते चलें कि, मौन का जीवन में होना जरूरी है इसमें मन की शांति की वजह से वह अधिक कार्यक्षम और निर्णयक्षम बनाता है। जिससे वह अपने ज़िंदगी में बहुत आगे बढ़ पाता है। अगर आप कुछ समय के लिए मौन होते है तो खुद को ईश्वर के साथ जोड़ पाते है यानि दिव्यता से जुड़ जाते है। यहां पर स्पष्ट है कि, महाकुंभ और मौनी अमावस्या के शुभ संयोग के दिन मौन व्रत धारण करने से आपको और भी अधिक शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है।






