Bhog Ke Niyam: घर के मंदिर में भगवान भोग लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान, मिलेगा शुभ फल
Bhog Lagane Ke Niyam: भगवान के लिए भोग हमेशा सात्विक और साफ-सुथरे तरीके से बनाना चाहिए। अगर आप देवी-देवताओं को उनका पसंदीदा भोग अर्पित करेंगे, तो वे प्रसन्न होंगे और प्रभु की कृपा बनी रहेगी।
- Written By: रीता राय सागर
भोग (फोटो.सोशल मीडिया)
Mandir Mein Bhog Lagane Ke Niyam: पूजा-पाठ हमेशा भगवान के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम है। पूजा के दौरान दीपक जलाना, आरती करना और भोग लगाना भगवान की आराधना का हिस्सा है। इन सभी गतिविधियों के बिना कोई भी पूजा या अनुष्ठान अधूरा माना जाता है। देवी-देवताओं को भोग लगाने के बाद उसी भोजन को प्रसाद के रूप में सभी ग्रहण करते हैं, लेकिन भोग लगाते समय कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए और किन नियमों का पालन करना चाहिए, यह जानना जरूरी है।
भोग लगाते समय इन मंत्रों
शास्त्रों में पूजा-पाठ से जुड़े कई नियम बताए गए हैं। वहीं, प्रसाद के बिना कोई भी पूजा पूरी नहीं होती है। ऐसे में अगर आप भगवान को भोग लगाते समय इस मंत्र का जाप करेंगे तो आपको पूजा का कई गुना लाभ मिलेगा।
त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।
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जब भी आप प्रभु को भोग लगाएं, तो इस मंत्र का उच्चारण करें। इसके माध्यम से हम प्रार्थना करते हैं कि वह हमारा प्रसाद स्वीकार करें और हम पर अपनी कृपा बनाए रखें।
भोग लगाने के नियम
भोग हमेशा सात्विक और साफ-सुथरे तरीके से बनाना चाहिए। अगर आप देवी-देवताओं को उनका पसंदीदा भोग अर्पित करेंगे, तो आपको अधिक लाभ मिलेगा। भोग लगाने के दौरान भोजन पात्र का ध्यान रखना भी जरूरी है। भोग के लिए हमेशा सोना, चांदी, तांबा या पीतल के पात्र का ही चुनाव करें। इसके अलावा मिट्टी या लकड़ी के बर्तन में भी भोग चढ़ाया जा सकता है।
भोग लगाने के लिए कभी भी एल्यूमीनियम, लोहा, स्टील या प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। भोग लगाने के बाद इसे कुछ देर के लिए मंदिर में ही छोड़ दें।
इन नियमों का भी रखें ध्यान
- भोग में तुलसी का एक पत्ता जरूर रखें। तुलसी के बिना भगवान भोग स्वीकार नहीं करते।
- भोग की थाली या कटोरी को भगवान की मूर्ति या तस्वीर के सामने रखें।
- अब अपने हाथों में जल लेकर थाली के चारों ओर घुमाएं और छोड़ दें।
- भोग को भगवान के समक्ष 5 से 10 मिनट के लिए छोड़ दें।
- अब थोड़ी देर के लिए आँखें बंद करके मानसिक रूप से भगवान को भोजन कराएं।
- इसके बाद परिवार के सभी लोगों के बीच प्रसाद का वितरण करें।
