
गुरु पूर्णिमा (सौ.सोशल मीडिया)
गुरु पूर्णिमा का पर्व इस बार 10 जुलाई को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा एक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। महर्षि वेदव्यास जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में गुरु पूर्णिमा का पर्व हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। आपको बता दें, यह पर्व गुरु और शिष्य के बीच पवित्र संबंध का प्रतीक माना जाता है। इसे व्यास पूर्णिमा और वेद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
हिंदू मान्यता के अनुसार, इस दिन, शिष्य अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उनके ज्ञान और मार्गदर्शन के लिए उनका सम्मान करते हैं।
गुरु पूर्णिमा भारत में अपने आध्यात्मिक गुरु के साथ-साथ अकादमिक गुरुओं के सम्मान में उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए मनाया जाने वाला पर्व है। आइए इस लेख में जानते हैं कि इस साल के गुरु पुर्णिमा की तिथि क्या है और साथ ही गुरु पुर्णिमा के महत्व
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, गुरु पूर्णिमा यानी आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 10 जुलाई को देर रात 1 बजकर 36 मिनट पर होगी। वहीं तिथि की समापन 11 जुलाई को देर रात 2 बजकर 6 मिनट होगा। उदया तिथि के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का पर्व 10 जुलाई को मनाया जाएगा।
सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा को इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। इन्होंने महाभारत, श्रीमद् भागवत और 18 पुराण जैसे महान ग्रंथों की रचना की थी। वेदव्यास ऋषि पराशर के पुत्र थे। इसके अलावा गुरु पूर्णिमा का मुख्य उद्देश्य गुरुओं को सम्मान करना और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हैं। इस दिन हम अपने गुरुओं से आशीर्वाद प्राप्त करके मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं।
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हर इंसान के जीवन में कोई न कोई गुरु होता है, खास बात ये है कि जो किसी को गुरु नहीं मानता है वो भी किसी न किसी से अपने जीवन में सीखता है। हम सब के जीवन में कोई न कोई हमारा आदर्श होता है। वे भी हमारे गुरु के समान होते हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन सभी लोगों को अपने गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करना चाहिए। ऐसा करने से न सिर्फ गुरु और शिष्य के बीच का संबंध अच्छा होता है बल्कि दोनों को एक दूसरे के प्रति सम्मान और बढ़ जाता है।






