Hanuman and Karna (Source. Pinterest)
Mahabharata War Mystery: महाभारत के युद्ध से जुड़ी कई कथाएं आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। ऐसी ही एक रहस्यमयी और रोमांचक घटना वह है, जब महाबली हनुमान जी स्वयं क्रोध में आ गए और पूरा युद्धक्षेत्र उनकी दहाड़ से थर्रा उठा। यह प्रसंग न सिर्फ हनुमान जी की शक्ति दिखाता है, बल्कि कर्ण, अर्जुन और श्रीकृष्ण की भूमिका को भी गहराई से समझाता है।
बहुत कम लोग जानते हैं कि महाभारत के युद्ध में हनुमान जी, धनुर्धर अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजमान थे। यह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण की योजना थी, ताकि अर्जुन का रथ अडिग रहे और कौरवों के बाण उसे क्षति न पहुंचा सकें।
युद्ध के दौरान जब कर्ण और अर्जुन आमने-सामने आए, तो कर्ण ने अर्जुन पर बाणों की वर्षा शुरू कर दी। कई बाण अर्जुन को लगे और वे घायल हो गए। यह दृश्य देखकर रथ की छत पर बैठे हनुमान जी का क्रोध भड़क उठा। रामभक्त हनुमान के लिए यह असहनीय था कि उनके सामने अर्जुन को इस तरह घायल किया जाए।
क्रोध में हनुमान जी ने ऐसी भयानक दहाड़ लगाई कि युद्धभूमि में मौजूद सभी योद्धा डर गए। कौरव सेना में भगदड़ मच गई, वहीं पांडव सेना भी आशंकित हो उठी कि अब क्या होने वाला है। स्वयं कर्ण कांपने लगा और उसे अपनी मृत्यु का आभास होने लगा।
कर्ण क्रोध में इतना अंधा हो गया था कि वह यह भी नहीं देख पा रहा था कि उसके बाण कहां गिर रहे हैं। युद्ध के नियमों के विपरीत, उसके कई बाण श्रीकृष्ण को भी लग गए, जिससे उनके शरीर से रक्त बहने लगा। यह देखकर हनुमान जी पूरी तरह आपा खो बैठे और उन्होंने कर्ण को मारने का निश्चय कर लिया।
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स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि अगर हनुमान जी कर्ण पर टूट पड़ते, तो युद्ध का परिणाम बदल सकता था। तभी श्रीकृष्ण ने हनुमान जी को स्पर्श कर शांत किया और उन्हें समझाया कि “यह त्रेता युग नहीं है”, यहां धैर्य आवश्यक है। हनुमान जी शांत तो हो गए, लेकिन उनकी आंखों में अभी भी क्रोध की ज्वाला थी और पूंछ आकाश में लहरा रही थी।
श्रीकृष्ण की योजना के अनुसार, हनुमान जी के भार से अर्जुन का रथ स्थिर रहा। यही कारण था कि युद्ध के दौरान कौरवों के शक्तिशाली बाण भी अर्जुन के रथ को तोड़ नहीं सके। यह प्रसंग हनुमान जी की शक्ति, संयम और धर्म की अद्भुत मिसाल है।