हरियाणा के नूंह में छुपा चमत्कारी मंदिर, जहां शिव के साथ आज भी जुड़ा है श्रीकृष्ण का नाम
Nalhar Mahadev Temple: हरियाणा के नूंह जिले में हाल ही में हुई हिंसा की घटनाओं ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच एक प्राचीन और रहस्यमयी स्थल अचानक चर्चा में आ गया है।
- Written By: सिमरन सिंह
Nalhar Mahadev Temple Nuh (Source. TripAdvisor)
Nalhar Mahadev Temple Nuh: हरियाणा के नूंह जिले में हाल ही में हुई हिंसा की घटनाओं ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच एक प्राचीन और रहस्यमयी स्थल अचानक चर्चा में आ गया नल्हड़ महादेव मंदिर। बहुत कम लोग जानते हैं कि यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि महाभारत काल से जुड़ा हुआ एक ऐतिहासिक तीर्थ है। हैरानी की बात यह है कि यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित होने के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण से भी गहराई से जुड़ा हुआ माना जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि शिव मंदिर और श्रीकृष्ण का आपस में क्या संबंध है?
नल्हड़ महादेव मंदिर का इतिहास और श्रीकृष्ण से संबंध
नल्हड़ महादेव मंदिर हरियाणा के नूंह जिले में फिरोजपुर झिरका क्षेत्र के गांव गहबर के पास स्थित है, जो नूंह शहर से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर है। अरावली पर्वत श्रृंखला की गोद में बसे इस मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों की गहरी आस्था है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के दौरान भगवान कृष्ण ने कौरवों और पांडवों के बीच समझौता कराने के लिए इसी स्थान को चुना था। यही वजह है कि यह मंदिर केवल शिवभक्तों ही नहीं, बल्कि कृष्ण भक्तों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।
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कदम के पेड़ से निकलता है कभी न खत्म होने वाला जल
नल्हड़ महादेव मंदिर की सबसे रहस्यमयी बात यहां स्थित कदम का विशाल पेड़ है। मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 287 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मान्यता है कि जहां-जहां भगवान कृष्ण के चरण पड़े, वहां कदम का पेड़ अवश्य पाया जाता है।
इस मंदिर में स्थित कदम के पेड़ की ऊंचाई 500 फीट से अधिक बताई जाती है और सदियों से इससे मीठा व स्वच्छ पानी लगातार निकलता आ रहा है। पेड़ के नीचे बनी कुंडली से मोटर के जरिए पानी निकाला जाता है, लेकिन मान्यता है कि चाहे जितना पानी निकाला जाए, इसकी मात्रा कभी कम नहीं होती। यही कारण है कि यह स्थान चमत्कारी माना जाता है।
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नल्हड़ महादेव मंदिर के प्रमुख त्योहार
नल्हड़ महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा कांवड़ यात्रा के दौरान भी बड़ी संख्या में भक्त यहां जल चढ़ाने आते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से भगवान शिव के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं।
