
मकर संक्रांति (सौ.सोशल मीडिया)
Makar Sankranti Ekadasi Same Day: भगवान सूर्य देव और शनिदेव को समर्पित मकर संक्रांति का पावन त्योहार 14 जनवरी, दिन बुधवार को पूरे देशभर में मनाया जाएगा। मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख और विशेष पर्व है। नए साल पर मकर संक्रांति हिंदू धर्म का पहला त्योहार होता है।
यह त्योहार हर साल पौष माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इसी दिन से खरमास खत्म होता है और शुभ व मांगलिक कार्यों जैसे शादी, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश आदि की शुरुआत होती है।
मकर संक्रांति के पावन दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना और कुछ कार्यों से बचना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इन नियमों का ध्यान रखने से सूर्य देव की कृपा बनी रहती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।आइए जानते हैं, मकर संक्रांति के दिन किन नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।
मकर संक्रांति पर प्रातःकाल पवित्र नदी या जल में स्नान का विशेष महत्व है। बिना स्नान किए दान-पुण्य या पूजा करना पूर्ण फल नहीं देता।
इस दिन सूर्य देव की पूजा अत्यंत आवश्यक मानी गई है। अर्घ्य न देना एक बड़ी भूल मानी जाती है।
मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन का सेवन इस दिन वर्जित माना गया है।
इससे पुण्य फल में कमी आती है।
तिल और गुड़ मकर संक्रांति के प्रतीक हैं।
इनका दान या सेवन श्रद्धा से करें, इन्हें फेंकना या अपमान करना अशुभ माना जाता है।
इस दिन गलत आचरण, झगड़ा या कटु वचन बोलने से पुण्य नष्ट हो सकता है।
अगर इस दिन कोई सहायता या दान की अपेक्षा से आए, तो उसे यथाशक्ति दान अवश्य दें।
मकर संक्रांति पर ब्रह्म मुहूर्त में उठना शुभ माना गया है।
देर तक सोना आलस्य और नकारात्मकता का संकेत माना जाता है।
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ज्योतिष गुरु के अनुसार, 14 जनवरी 2026 को षटतिला एकादशी है और इसी रात सूर्य मकर राशि में गोचर करेंगे। एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जबकि संक्रांति सूर्य देव की उपासना का पर्व है।
इस विशेष संयोग में किया गया स्नान, दान और जप सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी माना जाता है। इस दिन तिल का विशेष महत्व है तिल के दान और सेवन से पापों का नाश होता है और पितरों की कृपा प्राप्त होती है।






