पीरियड्स में महाशिवरात्रि की पूजा करें या नहीं? ज़रूर जानिए
Shivratri Worship During Menstruation:पीरियड्स में महाशिवरात्रि की पूजा करना लेकर परंपराओं में मतभेद हैं। जानिए क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएँ और महिलाओं के लिए सुरक्षित नियम।
- Written By: सीमा कुमारी
शिव-पार्वती(सौ.सोशल मीडिया)
Mahashivratri During Periods:हिन्दू धर्म में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पूजा-पाठ करने की मनाही होती है। लेकिन कई विद्वान और आध्यात्मिक गुरु ऐसा मानते हैं कि ईश्वर कि भक्ति मन से होती है इसलिए अगर कोई महिला पीरियड्स में भी महाशिवरात्रि का व्रत रखना चाहती है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
लेकिन ज्योतिष गुरू का कहना है कि, इस स्थिति में व्रत रखने के कुछ नियम हैं, जिन्हें पालन करना बहुत ही जरूरी है। यदि महाशिवरात्रि व्रत के दिन ही आपको पीरियड्स आ जाएं तो इस स्थिति में व्रत बीच में न छोड़ें क्योंकि संकल्प लेने के बाद व्रत अधूरा छोड़ना सही नहीं माना जाता है। लेकिन अगर आपको व्रत से पहले ही पीरियड्स आ जाते हैं तो बेहतर होगा कि व्रत न रखें।
क्या पीरियड्स में महाशिवरात्रि व्रत रखना चाहिए
अगर किसी महिला को महाशिवरात्रि के व्रत के दौरान पीरियड्स आ जाएं तो उसे व्रत को बीच में छोड़ने की जरूरत नहीं है। हालांकि यदि पीरियड्स व्रत शुरू होने से पहले ही शुरू हो जाएं तो व्रत नहीं रखना चाहिए।
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हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि पीरियड्स के दौरान पूजा-पाठ करना मना होता है। क्योंकि इसे शारीरिक रूप से अशुद्धि का समय माना जाता है। ऐसे में महिला को सिर्फ मन ही मन भगवान शिव का जाप करना चाहिए।
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पीरियड्स में कैसे करें महाशिवरात्रि पूजा
ज्योतिषयों के अनुसार, यदि व्रत के दौरान पीरियड्स आ जाएं और आप फिर भी उपवास रखना चाहती हैं तो उपवास किया जा सकता है लेकिन पूजा में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेना उचित नहीं होता। इस दौरान पूजा की सामग्री को छूना वर्जित है इसलिए बेहतर होगा कि पूजा के कार्य किसी और से कराए जाएं।
आप मौन रहकर भगवान शिव का ध्यान कर सकती हैं और नाम जप कर सकती हैं जिससे आपको पूजा का पूरा फल मिल सके।
महाशिवरात्रि व्रत 2026 पूजा विधि
- महा शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर व्रत का संकल्प लें।
- पूजा के लिए एक चौकी की स्थापना करें और उस पर पीला या लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाएं।
- फिर इस चौकी पर थोड़े चावल रखें और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें।
- एक मिट्टी या तांबे का कलश लेकर उस पर स्वास्तिक बनाएं और उसमें थोड़ा गंगाजल और शुद्ध जल मिला लें।
- साथ ही इसमें सुपारी, सिक्का और हल्दी की गांठ डालें।
- शिव जी के समक्ष गाय के घी का दीपक जलाएं और साथ ही एक छोटा शिवलिंग स्थापित करें।
- अगर घर में शिवलिंग नहीं है तो मिट्टी से इसे तैयार कर लें।
- शिवलिंग का जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक करें। मन ही मन ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें।
- इसके बाद शिवलिंग को साफ कपड़े से पोंछकर उस पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के फूल और फल-फूल आदि चढ़ाएं।
- फिर महा शिवरात्री की कथा पढ़ें और कपूर से भगवान शिव की आरती करें।
- इसके बाद मिठाई, खीर और फल का भोग लगाएं। पूजा संपन्न होने के बाद सभी में प्रसाद बांट दें।
