
शिव-पार्वती (सौ.सोशल मीडिया)
Bhadra Shadow on Mahashivratri: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे खास त्योहारों में है। पूरे देश में लोग भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का जश्न मनाते हैं। इस दिन भक्त पूरी श्रद्धा से उपवास रखते हैं, पूजा करते हैं, और भगवान शिव को खुश करने की कोशिश करते हैं।
इस वर्ष यह पावन दिन 15 फरवरी को पड़ रहा है। खास बात यह है कि इस बार महाशिवरात्रि के दिन भद्रा का योग भी बन रहा है, जिसे लेकर कई भक्तों के मन में यह मन में यह सवाल है कि क्या इससे शिव पूजा या जलाभिषेक पर कोई असर पड़ेगा।
ज्योतिषयों के अनुसार, पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी की शाम करीब 5 बजकर 04 मिनट से भद्रा शुरू होगी और इसका समापन 16 फरवरी की सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर होगा। यानी करीब 12 घंटे 19 मिनट तक भद्रा का साया रहेगा।
हालांकि ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस बार भद्रा का वास पाताल लोक में बताया गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि जब भद्रा पाताल में रहती है, तो उसका प्रभाव पृथ्वी पर नहीं पड़ता है।
इसलिए, महाशिवरात्रि के दिन भक्त बिना किसी असमंजस के भगवान शिव का अभिषेक और पूजा-पाठ कर सकते हैं। श्रद्धा और सच्चे मन से की गई आराधना ही सबसे अधिक फल देती है।
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ज्योतिष गणना के अनुसार, इस साल महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त है। जिनमें भक्त पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
पहला मुहूर्त सुबह 8 बजकर 24 मिनट मिनट से शुरू होकर 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
दूसरा मुहूर्त सुबह 9 बजकर 48 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक का रहेगा।
तीसरा मुहूर्त अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा, जो सुबह 11 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक का रहेगा, जिसमें जल चढ़ाना अत्यंत फलदायी रहेगा।
चौथा मुहूर्त शाम को शुभ-उत्तम मुहूर्त 06 बजकर 11 मिनट से 07 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इन सभी मुहूर्तों में भक्त शिव जी का जलाभिषेक कर सकते हैं।
इन सभी मुहूर्तों में श्रद्धा और सच्चे मन से शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।






