Maharana Pratap Jayanti 2026: आज है महाराणा प्रताप की जयंती, जानें हल्दीघाटी के महान योद्धा की शौर्यगाथा
Maharana Pratap Jayanti: भारतीय इतिहास के पन्नों में भारत के शूरवीरों की कहानियां छुपी हुई है, जिससे आज भी लोगों को प्रेरणा मिलती है। भारतीय इतिहास में एक अमर और अमिट नाम है- महाराणा प्रताप का।
- Written By: रीता राय सागर
महाराणा प्रताप (फोटो.सोशल मीडिया)
Maharana Pratap Birth Anniversary: भारत की भूमि पर ऐसे अनेकों वीर सपूतों ने जन्म लिया, जो भारत की स्वाधीनता के लिए अपने प्राणों को न्योछावर किया। भारत के एक ऐसे ही वीर सपूत महान योद्धा थे मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप। आज उनकी 486वीं जयंती है। भारत के इतिहास में महाराणा प्रताप का नाम अमिट है।
महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 ईस्वी ज्येष्ठ शुक्त तृतीया तिथि को राजस्थान के कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था। वे महाराजा राणा सांगा के पौत्र और महाराजा उदयसिंह के पुत्र थे, उनकी माता का नाम राणी जीवत कंवर था। महाराणा प्रताप के बचपन का नाम कीका था। उन्होंने बचपन में ही घुड़सवारी और तलवारबाजी सीख ली थी। देश भक्ति तो जैसे उनकी नस-नस में बसी थी।
जब मेवाड़ में रहकर चितौड़ में की थी लड़ाई
मेवाड़ में रहकर महाराणा प्रताप ने चित्तौड़ के बाहर अकबर की सेना के लिए काफी दिक्कतें खड़ी कर दी थीं। 1576 में अकबर ने मेवाड़ जीतने के लिए महाराणा प्रताप से लड़ाई का फैसला किया। कई छोटे-मोटे युद्ध हुए। जून, 1576 को अकबर और महाराणा प्रताप के बीच एक भयंकर युद्ध लड़ा गया जिसने अकबर और उसकी सेना को हिला कर रख दिया। यह युद्ध था हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध जिसमें महाराणा प्रताप का शौर्य और पराक्रम देखते ही बनता था। कहते है इस युद्ध के अंत तक भी कोई हार मानने को तैयार नहीं था और कहा जाता है कि यह युद्ध बिना किसी निर्णय के ही खत्म किया गया।
सम्बंधित ख़बरें
Muharram 2026: मुहर्रम में क्यों मनाया जाता है मातम? जानिए यौम-ए-अशूरा और कर्बला के इतिहास का सच
Vat Purnima 2026: वट पूर्णिमा पर बरगद के पेड़ में क्यों लपेटा जाता है धागा? जानें इसके पीछे की मान्यता
प्रद्युम्न चतुर्थी पर भूलकर भी न करें ये गलती, पहले जान लें सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
17 जून का इतिहास : आज के दिन फ्रांस ने अमेरिका को दिया था आजादी का प्रतीक, जाने और क्या है खास?
शौर्यगाथा बताती है हल्दीघाटी का युद्ध
महाराणा प्रताप ने अपनी मां से अपनी युद्ध कौशल की शिक्षा ग्रहण की थी। इस युद्ध में महाराणा प्रताप के खेमे में महज 20 हजार सैनिक थे और जब कि अकबर के पास करीबन 85 हजार सैनिकों की फौज थी। इसके बावजूद इस युद्ध को अकबर जीत नहीं पाया था। महाराणा प्रताप युद्ध में 81 किलो वजनी भाला, 72 किलो वजनी कवच, ढाल और दो तलवारें लेकर जाते थे। महाराणा प्रताप का शौर्य और पराक्रम देखकर स्वयं अकबर भी अचंभित था।
हल्दी घाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप और उनके सैनिकों की वीरता और अदम्य साहस की कहानी ऐतिहासिक है। इसके साथ ही महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की स्वामी भक्ति और बहादुरी भी इस युद्ध का अहम हिस्सा रही है।
कहा जाता है कि महाराणा प्रताप जंगलों में रहकर युद्ध की तैयारी करते थे। 1596 में महाराणा प्रताप को शिकार खेलते समय चोट लगी, जिससे वे उबर नहीं पाए और 19 जनवरी 1597 को 57 वर्ष की उम्र में चावड़ में उनका देहांत हो गया।
