
भगवान शिव (सौ.सोशल मीडिया)
Lord Shiva Favorite Colors: 15 फरवरी 2026, रविवार को पूरे देशभर में महाशिवरात्रि का महापर्व मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है, जिसे भगवान शिव की आराधना और व्रत के रूप में मनाया जाता है। मान्यतानुसार, इसी दिन देवों के देव महादेव और माता पार्वती का विवाह हुआ था।
इस दिन भक्त पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और भगवान शिव से सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की प्राप्ति की कामना करते हैं। महाशिवरात्रि न केवल आध्यात्मिक महत्व रखती है, बल्कि इस दिन किए गए कर्म और पूजा का विशेष प्रभाव भी माना जाता है। पूजा के दौरान सही रंगों के कपड़े पहनना, शुद्धता और भक्ति की भावना को और बढ़ा देता है।
ऐसा माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन हरे रंग के कपड़े पहनना अतिशुभ होता है। इसके अलावा आप लाल, पीले, गुलाबी, नारंगी और सफेद रंग के कपड़े भी पहन सकते हैं।
ये सारे ही रंग भगवान शिव को प्रिय माने जाते हैं। शादीशुदा जोड़े को पूजा में खासकर लाल और पीले रंग के कपड़े पहनाना चाहिए। क्योंकि लाल रंग सौभाग्य, प्रेम और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
हिंदू धर्म के अनुसार, काला रंग किसी धार्मिक अनुष्ठान या उत्सव के लिए शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए महाशिवरात्रि के दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। ये रंग नकारात्मक ऊर्जा का प्रतिक माना जाता है।
महाशिवरात्रि का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और मानसिक दृष्टि से भी बहुत बड़ा है। इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। साथ ही, यह पर्व भक्तों को अपने अंदर संयम, तप और भक्ति की भावना विकसित करने की प्रेरणा देता है।
कई मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर की गई साधना और श्रद्धापूर्ण पूजा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। जो अविवाहित हैं, उन्हें अपने इच्छित जीवनसाथी की प्राप्ति होती है, और विवाहित जोड़ों को वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और सामंजस्य मिलता है।
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इस दिन का एक और विशेष महत्व यह है कि शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, फल और फूल चढ़ाने से नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं और जीवन में समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि पर्व व्यक्ति के आध्यात्मिक जीवन को जागृत करने, जीवन में नई ऊर्जा भरने और शिवभक्ति के मार्ग पर अग्रसर होने का सबसे उपयुक्त समय है।






