आखिर माघ महीने में मूली-धनिया खाने से क्यों मना किया गया है? जानिए क्या कहता है आयुर्वेद
Magh Month Foods To Avoid:आयुर्वेद में माघ महीने में कुछ खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज करने की सलाह दी गई है, जिनमें मूली और धनिया भी शामिल हैं। जानिए क्यों मना किया गया है?
- Written By: सीमा कुमारी
माघ महीने में क्यों नहीं खाना चाहिए मूली-धनिया (सौ.सोशल मीडिया)
Magh Month Ayurveda Diet:माघ महीने की शुरुआत 4 जनवरी 2026 से हो गई हैं। सनातन धर्म में माघ महीने का बड़ा महत्व होता हैं। धार्मिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टि से यह पावन महीना खास महत्व रखता है। इस दौरान खान-पान को लेकर कई नियम बताए गए हैं।
आयुर्वेद में माघ महीने में कुछ खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज करने की सलाह दी गई है, जिनमें मूली और धनिया भी शामिल हैं। सवाल उठता है कि आखिर इन सामान्य सब्जियों को खाने से क्यों मना किया गया है?
माघ महीने में क्यों नहीं खाना चाहिए मूली-धनिया
आयुर्वेद के अनुसार, माघ महीने में ठंड का प्रभाव अधिक रहता है और इस समय पाचन अग्नि कमजोर हो सकती है। मूली और धनिया दोनों ही स्वभाव से ठंडी तासीर वाले माने जाते हैं। ऐसे में इनका सेवन करने से शरीर में कफ दोष बढ़ सकता है।
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मूली खाने से होने वाली समस्याएं
माघ महीने में मूली का सेवन करने से गैस, अपच, जोड़ों में दर्द और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। आयुर्वेद मानता है कि इस समय मूली शरीर में वात और कफ को असंतुलित कर देती है, जिससे रोगों की संभावना बढ़ती है।
धनिया क्यों माना गया है वर्जित?
धनिया आमतौर पर पाचन के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन माघ में इसकी ठंडी प्रकृति शरीर की गर्मी को कम कर सकती है। इससे सर्दी, खांसी और कमजोरी जैसी परेशानियां हो सकती हैं, खासकर बुजुर्गों और बच्चों में।
माघ महीने में किन चीजों का करे सेवन
माघ महीने में आयुर्वेद गरम तासीर वाले भोजन जैसे तिल, गुड़, घी, सूप और हल्का मसालेदार खाना लेने की सलाह देता है। जो शरीर को गर्मी देते हैं, जोड़ों के दर्द से राहत दिलाते हैं और ऊर्जा बनाए रखते हैं। इसी कारण मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ का विशेष महत्व होता है।
इस महीने घी और मक्खन का सीमित मात्रा में सेवन भी लाभ देता है। घी पाचन को मजबूत करता है और शरीर में अंदरूनी गर्माहट बनाए रखता है। इसके साथ ही गर्म दूध पीना भी फायदेमंद माना जाता है, खासकर रात के समय।
माघ में मौसमी सूप, दालें और खिचड़ी जैसे हल्के व गरम भोजन शरीर को ताकत देते हैं और पाचन तंत्र को नुकसान नहीं पहुंचाते। इसके अलावा अदरक, काली मिर्च और हल्दी जैसे मसालों का उपयोग सर्दी-जुकाम से बचाव में मदद करता है।
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फलो में आंवला विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। यह इम्यूनिटी बढ़ाता है और शरीर को अंदर से मजबूत करता है। कुल मिलाकर माघ महीने में ऐसा भोजन करना चाहिए जो शरीर को गर्म रखे और स्वास्थ्य को संतुलित बनाए।
