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महाभारत का युद्ध कितने दिन चला? जानिए वे 18 दिन जिन्होंने बदल दी पूरी दुनिया की सोच

Mahabharata War: कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि पर शंखनाद गूंजा, तब सामने केवल दो सेनाएं नहीं थीं वहां भाई भाई के खिलाफ, गुरु शिष्य के सामने और मित्र एक-दूसरे के विरुद्ध खड़े थे।

  • Written By: सिमरन सिंह
Updated On: Feb 12, 2026 | 04:27 PM

Mahabharata war (Source. Pinterest)

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How Many Days Did The Mahabharata War Last: जब कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि पर शंखनाद गूंजा, तब सामने केवल दो सेनाएं नहीं थीं वहां भाई भाई के खिलाफ, गुरु शिष्य के सामने और मित्र एक-दूसरे के विरुद्ध खड़े थे। वर्षों से पनप रही ईर्ष्या, अन्याय और मौन सहमति ने आखिरकार महाभारत के युद्ध को जन्म दिया। यह महायुद्ध कुल 18 दिन चला, लेकिन इन 18 दिनों ने इतिहास और मानव चेतना की दिशा बदल दी।

दिन 1 से 9: भीष्म पितामह का अजेय प्रभाव

युद्ध के शुरुआती नौ दिनों तक कौरव सेना का नेतृत्व भीष्म पितामह के हाथों में था। उनके धनुष से निकला हर बाण मानो विनाश का संकेत था। पांडव पूरी शक्ति लगाने के बावजूद उन्हें परास्त नहीं कर सके। युद्धभूमि में एक ही चर्चा थी, “भीष्म को हराना असंभव है।”

दिन 10: भीष्म का पतन और युद्ध की दिशा में बदलाव

दसवें दिन अर्जुन ने शिखंडी को आगे रखकर भीष्म पर प्रहार किया। भीष्म गिरे जरूर, लेकिन धरती पर नहीं वे बाणों की शैय्या पर लेट गए। यह घटना केवल एक योद्धा का पतन नहीं थी, बल्कि धर्म और अधर्म की सीमाओं को और जटिल बना गई।

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दिन 11 से 14: द्रोणाचार्य की रणनीति और चक्रव्यूह

भीष्म के बाद गुरु द्रोणाचार्य सेनापति बने। उनका उद्देश्य स्पष्ट था पांडवों को हर हाल में समाप्त करना। इसी दौरान चक्रव्यूह की रचना हुई, जिसमें फँसे अर्जुन पुत्र अभिमन्यु।

दिन 13: अभिमन्यु का बलिदान

एक युवा योद्धा, छह महारथियों से घिरा हुआ। युद्ध के नियम तोड़े गए और धर्म घायल हुआ। अभिमन्यु का वध महाभारत का सबसे हृदयविदारक और क्रूर मोड़ साबित हुआ।

दिन 15: द्रोणाचार्य का अंत

“अश्वत्थामा मारा गया” यह अधूरा सत्य द्रोणाचार्य के मनोबल को तोड़ने के लिए बोला गया। युद्ध में सत्य सबसे पहले बलिदान होता है। द्रोण ने शस्त्र त्याग दिए और उनका अंत हुआ।

दिन 16 और 17: कर्ण और अर्जुन का निर्णायक संघर्ष

अब मैदान में कर्ण थे दानवीर, पर दुर्भाग्य के शिकार। सत्रहवें दिन उनका रथ धरती में धँस गया और उसी क्षण अर्जुन का बाण उनके जीवन का अंत बन गया।

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दिन 18: दुर्योधन का पतन और युद्ध का समापन

अंतिम दिन भीम और दुर्योधन के बीच गदा युद्ध हुआ। नियमों के विरुद्ध जांघ पर प्रहार हुआ और दुर्योधन पराजित हुए। कौरव वंश समाप्त हो गया। पांडव विजयी तो हुए, लेकिन खुशी कहीं खो गई थी।

युद्ध के बाद की पीड़ा

रात में अश्वत्थामा का नरसंहार हुआ। हस्तिनापुर में शोक छा गया। सिंहासन पर बैठा राजा युधिष्ठिर जिसने जीतकर भी सब कुछ खो दिया था। महाभारत का युद्ध केवल 18 दिन चला, लेकिन उसके परिणाम हजारों वर्षों तक गूंजते रहे। यह महागाथा सिखाती है कि धर्म का मार्ग सरल नहीं होता, युद्ध में कोई सच्चा विजेता नहीं होता, और कभी-कभी जीत भी हार जैसी महसूस होती है।

Long did the mahabharata war last about the 18 days that changed the worlds thinking

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Published On: Feb 12, 2026 | 04:27 PM

Topics:  

  • Mahabharat
  • Religion
  • Sanatana Dharma

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