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त्रिशूल, नंदी, डमरू, अर्धचंद्र, तीसरा नेत्र और भस्म, जानिए भगवान शिव के इन विशेष प्रतीकों में छुपी बातें

Shiva Attributes: भगवान शिव के त्रिशूल, नंदी, डमरू, अर्धचंद्र, तीसरा नेत्र और भस्म जैसे प्रतीकों में गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अर्थ छिपे हैं। जानिए इनके पीछे की खास बातें।

  • Written By: सीमा कुमारी
Updated On: Feb 11, 2026 | 09:35 PM

भगवान शिव (सौ.सोशल मीडिया)

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Lord Shiva Symbols: महाशिवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह शुभ दिन और महान रात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के सम्मान में मनाई जाती है। शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव एक देवता होने के साथ-साथ ध्यान, योग और गहन आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक भी माने जाते हैं। उनके अनेक प्रतीक हैं, जिनके अद्भुत अर्थ और रहस्य भी हैं। आइए इस शुभ अवसर पर जानते हैं त्रिशूल, डमरू तीसरी आंख, नाग, चांद और नंदी के बारे में-

शिव प्रतीकों के क्या है आध्यात्मिक अर्थ और रहस्य

  • त्रिशूल

त्रिशूल भगवान शिव का प्रमुख और पवित्र अस्त्र माना जाता है। यह केवल एक हथियार नहीं, बल्कि जीवन, चेतना और आध्यात्मिक संतुलन का प्रतीक है।

  • नाग

शिव पुराण के अनुसार, शिव जी के गले में लिपटा नाग कुण्डलिनी शक्ति का प्रतीक बताया जाता है। शिव जी का ये प्रतीक संकेत देता है कि व्यक्ति को अहंकार से ऊपर उठकर सांसारिक बंधनों से मुक्त होना चाहिए। ये चेतना की जागृति का भी संकेत देता है।

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  • शिव जी की तीसरी आंख

शिव की माथे पर स्थित तीसरी आंख ज्ञान का सर्वोच्च प्रतीक बताई जाती है। यह आंख अज्ञानता, बुराई और भ्रम का नाश करती है। व्यक्ति के अंतर्ध्यान में लीन होने के बाद ये आंख खुलती है। इससे विवेक की शक्ति का संदेश मिलता है।

  • अर्धचंद्र और नंदी

शिव के जटाओं पर विराजमान अर्धचंद्र समय का सूचक माना जाता है। ये समय पर नियंत्रण, मन की एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन जीवन का संकेत देता है। वही नंदी शिव के वाहन होने के साथ-साथ उनके परम भक्त भी हैं। नंदी से समर्पण, धैर्य, शक्ति और अडिग भक्ति का संदेश मिलता है।

यह भी पढ़ें:-रावण ही नहीं, माता पार्वती समेत ये 4 भी हैं भगवान शिव के परम भक्त

  • डमरू और भस्म

डमरू शिव जी की सृष्टि की ध्वनि का प्रतीक माना गया है। यह नाद ब्रह्म और जीवन की शुरुआथ का संकेत देता है। वही शिव जी द्वारा लपेटा गया भस्म भस्म जीवन के क्षणभंगुरता और वैराग्य की याद दिलाता है।

शिवजी का हर शृंगार जीवन की प्रेरणा है जो यह बताता है कि जीव को कर्म करने की स्वतंत्रता है अगर वह अपने अंदर की बुराइयों जैसे- काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार पर अपने तीसरे नेत्र का अंकुश रखे तो वह सदैव सुखी रहेगा। यदि वह इन पर अंकुश नहीं रखता तो यही उसका विनाश कर देती है।

Lord shiva trishul nandi damru third eye meaning

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Published On: Feb 11, 2026 | 09:35 PM

Topics:  

  • Lord Shiva
  • Religion
  • Sanatan Hindu religion

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