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कंचक में कन्याओं को हलवा, पूरी और चना खिलाने की परंपरा का रहस्य जानिए, किस बात का प्रतीक हैं ये चीज़
kanya pujan significance:नवरात्रि के अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजा में हलवा पूरी और चना खिलाने का विधान है, लेकिन क्या आपके मन में कभी ये सवाल आया कि आखिर नवमी के दिन काले चने क्यों बनाते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी

कन्याओं को क्यों खिलाते हैं हलवा पूरी और चना (सौ.सोशल मीडिया)
Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि अब अंतिम पड़ाव में है। कल 1 अक्टूबर को महानवमी के साथ इस पर्व का समापन हो जाएगा। जैसा कि आप जानते हैं कि, नवरात्रि के अष्टमी और नवमी के दिन मां दुर्गा को भोग लगाने से लेकर कन्या पूजन के प्रसाद तक के लिए, काले चने, हलवा और पूड़ी बनाने की परंपरा सदियों पुरानी है।
मां दुर्गा के भक्त अष्टमी और नवमी के दिन छोटी-छोटी कन्याओं को घर बुलाकर हलवे-काले चने का प्रसाद खिलाते हैं। नवरात्रि के प्रसाद में काले चने और हलवे का प्रसाद मुख्य रूप से बनाया जाता है, ये बात तो आप बचपन से सुनते और देखते आए हैं।
लेकिन, क्या आप इसके पीछे की वजह भी जानते हैं। अगर आपको लगता है कि इसके पीछे सिर्फ कोई धार्मिक कारण होगा, तो आप गलत हैं। जी हां, नवरात्रि के इस प्रसाद का संबंध आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कन्या पूजन के प्रसाद में हलवा-काले चने और पुड़ी क्यों शामिल किया जाता है।
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कन्याओं को क्यों खिलाते हैं हलवा पूरी और चना
नवरात्रों के दौरान, विशेषकर महाष्टमी और नवमी के कन्या पूजन के दिन, देवी माँ को चना, हलवा और पूरी का भोग अर्पित करना एक महत्वपूर्ण धार्मिक विधान है। कई लोग यह सोचते हैं कि आखिर क्यों इन्हीं तीन पदार्थों को भोग स्वरूप चढ़ाया जाता है? इसका उत्तर केवल स्वाद या परम्परा में नहीं, बल्कि इसके गहरे धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व में छिपा है।
यह भोग केवल भोजन नहीं है, बल्कि भक्त की श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है, और प्रत्येक पदार्थ अपने साथ एक खास संदेश लिए हुए है –
चना: शक्ति, ऊर्जा और स्वास्थ्य का प्रतीक
स्कंद पुराण और देवी भागवतम् जैसे ग्रंथों में उल्लेख है कि देवी को चना बहुत प्रिय है। यह एक शुद्ध और पौष्टिक अनाज माना जाता है। चना अर्पित करने का धार्मिक अर्थ है कि भक्त देवी से शक्ति और ऊर्जा की प्राप्ति की कामना करता है।
देवी स्वयं संपूर्ण सृष्टि की शक्ति का प्रतीक हैं, इसलिए उन्हें अन्न का भोग अर्पित करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
हलवा: सुख, समृद्धि और संतोष का प्रतीक
भविष्य पुराण और मार्कण्डेय पुराण में हलवे को देवी का प्रिय मीठा भोग बताया गया है। हलवे का मीठा स्वाद जीवन में सुख, समृद्धि और संतोष का प्रतीक है। इसे देवी को अर्पित करना घर में शांति और आनंद लाने वाला माना जाता है।
पुड़ी: भक्ति, उत्साह और सेवा भाव का प्रतीक
पद्म पुराण और ब्रह्म वैवर्त पुराण में पूरी और अन्य तली हुई चीज़ों का भोग चढ़ाने का महत्व बताया गया है। पूरी अर्पित करना भक्त की पूरी स्वीकृति, उत्साह और सेवा भाव को दर्शाता है। हलवे के साथ पूरी देने की प्रथा यह भी बताती है कि भोग स्वादिष्ट होने के साथ-साथ संतुलित और पोषणयुक्त भी होना चाहिए।
ये भी पढ़ें-महानवमी की तिथि इतने बजे तक, जानिए इस दिन का क्या है सनातन धर्म में महत्व
कुल मिलाकर कहे तो, चना शक्ति और स्वास्थ्य का, हलवा मीठे फल और समृद्धि का, और पुड़ी भक्ति और सेवा भाव का प्रतिनिधित्व करते हैं।
देवी को यह भोग अर्पित करना, भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार करता है, जो इस परंपरा को और भी खास बनाता है और जो सदियों चली आ रही हैं।
Know the secret of the tradition of feeding halwa puri and chana to girls in kanchak
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