गणेशजी को बेहद प्रिय होती है दूर्वा, जानिए 21 दूर्वा अर्पित करने का क्या होता है महत्व
Ganpati 21 Durva Significance: दूर्वा अर्पित करने से गणपति जी को दूर्वा से शीघ्र प्रसन्न किया जा सकता है. मान्यताओं के मुताबिक बप्पा को 21 दूर्वा अर्पित करने से सभी तरह की विघ्न-बाधाएं दूर होती है।
- Written By: दीपिका पाल
गणपति को 21 दूर्वा चढ़ाने का रहस्य (सौ. सोशल मीडिया)
Ganpati 21 Durva Significance: प्रथम पूज्य गणपति जी की पूजा करने का महत्व होता है। इस समय 10 दिनों के गणेश उत्सव का दौर चल रहा है। इस उत्सव में गणपति जी आराधना की जाती है तो वहीं पर दूर्वा अर्पित करने का महत्व भी होता है। कहते है कि, गणेश जी को दूर्वा या दूब घास बहुत प्रिय होती है। दूर्वा अर्पित करने से गणपति जी को दूर्वा से शीघ्र प्रसन्न किया जा सकता है. मान्यताओं के मुताबिक बप्पा को 21 दूर्वा अर्पित करने से सभी तरह की विघ्न-बाधाएं दूर होती है।
गणेश जी के उग्र रुप को शांत करने के लिए दूर्वा का शीतल प्रभाव होता है जिसे अर्पित करने का महत्व है। दूर्वा अर्पित करने से जुड़ी पौराणिक कथा मिलती है चलिए जानते हैं इसके बारे में।
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क्या है पौराणिक कथा
यहां पर माना जाता है कि एक बार गणेश जी ने अनलासुर नामक राक्षस को निगल लिया था, उसके तेज के कारण गणपति महाराज का पेट जलने लगा था।तब ऋषियों ने उन्हें दूर्वा खाने को दी, जिससे उनका पेट शांत हो गया।माना जाता है कि इस घटना के बाद से ही गणेश जी को दूर्वा प्रिय हो गई। यहां पर बात की जाएं दूर्वा 21 क्यों अर्पित की जाती है तो इसका जवाब है कि, दूर्वा के 21 संख्या का अर्थ शरीर के तीन तत्वों सत्त्व,रज और तम के 7-7 गुणों का प्रतीक होता है। इस वजह से उन्हें दूर्वा अर्पित की जाती है। वहीं पर 21 दूर्वा अर्पित करने से जीवन में सभी तरह की समस्याओं से छुटकारा मिलने के साथ सभी दोषों से छुटकारा मिलता है।
21 दूर्वा का महत्व
- एकाग्रता मन को एकाग्र करने में सहायता
- द्वैत, बलिदान, सुख और दुख का प्रतीक
- तीसरी दूर्वा सत्व (ज्ञान), रज (इच्छा) और तम (आलस्य) पर नियंत्रण
- चतुर्वेद उपासना और ज्ञान प्राप्ति की दिशा में
- पांच तत्वों का बोध जिसमें पृथ्वी, अपा, अग्नि, वायु और आकाश का संतुलन
- मूलाधार से आज्ञा चक्र तक छह चक्र को जागृत कर ऊर्जा प्रवाह का निर्माण करना
- सप्तधातु शुद्धि शरीर में सात धातुओं की शुद्धता
- आठ दिशाओं में सुरक्षा
- नवग्रह शांति ग्रह दोष निवारण
- दसों दिशाओं में नकारात्मक ऊर्जा का नाश
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