Vibhuvan Sankashti Chaturthi : 3 साल बाद आ रही है विभुवन संकष्टी चतुर्थी, भूल से भी न करें ये काम
Vibhuvan Sankashti Chaturthi :3 साल बाद आने वाली विभुवन संकष्टी चतुर्थी का विशेष धार्मिक महत्व माना जा रहा है। इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान गणेश ( सौ.जैमिनी)
Vibhuvan Sankashti Chaturthi Shubh Muhurat: 3 जून को विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। यह संकष्टी चतुर्थी का व्रत हर 3 साल में एक बार मनाई जाती है। संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान भी किया जाता है।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत महत्व
सनातन धर्म में विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत बड़ा महत्व है। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना करने से काम में आ रही बाधा दूर होती है। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
ऐसा माना जाता है कि विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन कुछ गलतियों को करने से गणपति बप्पा नाराज हो सकते हैं और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।
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संकष्टी चतुर्थी के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
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मांस, मदिरा का सेवन न करें
धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, संकष्टी चतुर्थी के दिन भूलकर भी मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन सात्विक और शुद्ध भोजन का ही सेवन करना चाहिए।
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काले रंग का कपड़ा न पहने
बताया जाता है कि, संकष्टी चतुर्थी के दिन मांस, मदिरा के सेवन के अलावा काले रंग का कपड़ा भी नही पहनने चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ एवं लाल के कपड़े पहनें।
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तुलसी न चढ़ाए
सनातन हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक, भगवान गणेश की पूजा में तुलसी के पत्तों को शामिल नहीं करना चाहिए। माता तुलसी ने गणेश जी को श्राप दिया था। इसलिए भगवान गणेश को तुलसी अर्पित नहीं करनी चाहिए। पूजा के दौरान प्रभु को प्रिय दूर्वा जरूर अर्पित करें।
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करें चंद्र दर्शन
संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करने के बाद व्रत का पारण करना चाहिए। रात को चंद्रोदय होने पर दूध और जल से अर्घ्य दें। इसके बाद ही व्रत व्रत खोलें। ऐसा माना जाता है कि व्रत के दौरान चंद्र दर्शन न करने से साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।
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बड़ों का अपमान करना
संकष्टी चतुर्थी के दिन किसी से विवाद न करें। साथ ही बुजुर्गों का अपमान न करें। ऐसा माना जाता है कि इस गलती को करने से पूजा का शुभ फल प्राप्त नहीं होता है और भगवान गणेश नाराज हो सकते हैं।
