बुधवार से शुरू हो रहा है कार्तिक मास, इस महीने श्रीहरि विष्णु की इस विधि से करें पूजा
Kartik Month Rituals: सनातन धर्म में कार्तिक मास को सभी महीनों में सबसे पुण्य फलदायी महीना माना गया है। इसे भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों का प्रिय महीना कहा गया है।
- Written By: सीमा कुमारी
कार्तिक मास में किस भगवान की पूजा होती है (सौ.सोशल मीडिया)
Kartik Month Lord Vishnu Puja: 8 अक्टूबर 2025 यानी बुधवार से कार्तिक मास की शुरुआत होने जा रही है। सनातन धर्म में इस महीने का विशेष महत्व होता है। ये महीना भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि, जगत के पालनहार भगवान विष्णु चार महीनों की योगनिद्रा के बाद कार्तिक मास में जागते है।
कहा जाता है कि, इस अवधि में भगवान विष्णु जल में निवास करते है। यही कारण है कि हिंदू धर्म में इस महीने को बेहद पवित्र और खास माना गया है। इस महीने दान-पुण्य, स्नान और पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व होता है। ऐसे में आइए जानते हैं, कार्तिक मास में किस भगवान की पूजा होती है। और जानते हैं इससे जुड़े तमाम बातें।
कैसे करें कार्तिक मास में भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा
- कार्तिक मास के दौरान सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- यदि संभव हो, तो इस महीने गंगा नदी, या किसी अन्य नदी, तालाब या कुएं के जल से स्नान करें।
- ऐसा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- स्नान के बाद पूजा स्थल की सफाई करें और घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
- इसके बाद भगवान विष्णु का आह्वान करें और उन्हें धूप, अगरबत्ती, फूल, फल और अक्षत अर्पित करें।
- फिर भगवान विष्णु को भोग लगाएं और उनके मंत्रों का जाप करें।
भगवान विष्णु को इन चीजों का भोग अवश्य अर्पित करें
ज्योतिषयों के अनुसार, जगत के संचालनकर्ता भगवान विष्णु को केला, पंचामृत, गुड़, चने और मखाने की खीर का भोग अर्पित करना शुभ होता है। ऐसा कहा जाता है कि ये सभी वस्तुएं भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। ऐसा करने से भगवान नारायण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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भगवान विष्णु की पूजा करते समय कौन-से रंग का वस्त्र पहनें
ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए उनकी पूजा या आराधना के समय पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना गया है।
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पूजा के दौरान क्या करने से बचना चाहिए
सनातन धर्म में कार्तिक मास विशेष महत्व रखता है। कहा जाता है कि, इस पूरे महीने क्रोध, अपशब्दों का प्रयोग और झगड़ा करने से बचना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है और इससे पूजा का फल कम हो जाता है।
इन मंत्रों का करें जाप
1) नारायण गायत्री मंत्र
“ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि.
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥”
2) ॐ नमो नारायणाय
3) ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
