काल भैरव जयंती बुधवार को, इस दिन करें ये उपाय, कष्टों से मिलेगी मुक्ति
Kaal Bhairav Jayanti :मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ उपाय करने से भगवान काल भैरव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही, सभी दुखों से छुटकारा मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में-
- Written By: सीमा कुमारी
कब मनाई जाएगी कालभैरव जयंती (सौ.सोशल मीडिया)
Kaal Bhairav Jayanti 2025 Ke Upay: कालभैरव भगवान शिव के उग्र रूप को समर्पित काल भैरव जयंती हिन्दू धर्म में खास महत्व रखता है। इस बार मार्गशीर्ष माह की अष्टमी तिथि यानी कालभैरव जयंती का पर्व 12 नवंबर 2025, दिन बुधवार को मनाया जाएगा।
कहते हैं कि जो भी भक्त इस दिन सच्चे मन से शिव के रौद्र रूप काल भैरव की उपासना करता है, बाबा काल भैरव उसके तमाम कष्ट व परेशानियां हर लेते हैं और उसकी हर मनोकामनाएं भी पूरी करते हैं।
कहा जाता है कि, इस दिन पर कुछ खास उपाय भी किए जाते है। मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ उपाय करने से भगवान काल भैरव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही, सभी दुखों से छुटकारा मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं इस दिन की जाने वाली विशेष उपायों के बारे में-
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कब मनाई जाएगी कालभैरव जयंती
पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 नवंबर 2025, मंगलवार को सुबह 11 बजकर 08 मिनट पर हो रही है। इस तिथि का समापन 12 नवंबर 2025, बुधवार को सुबह 10 बजकर 58 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि को देखते हुए कालभैरव जयंती का पर्व 12 नवंबर, बुधवार को मनाया जाएगा।
काल भैरव जयंती के दिन करें ये उपाय:
नारियल या जलेबी का भोग
ज्योतिषियों के अनुसार, काल भैरव जयंती के दिन पूजा के बाद भगवान को मीठी रोटी, नारियल या जलेबी का भोग लगाना चाहिए। भगवान काल भैरव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। इस दिन पर भैरव चालीसा या भैरव अष्टक का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और जीवन में सुख-शांति आती है।
काले रंग का धागा चढ़ाना
काल भैरव जयंती पर पूजा के समय भगवान काल भैरव के चरणों में एक काले रंग का धागा चढ़ाना चाहिए। इसके बाद ऊँ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ऊँ मंत्र का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से सभी प्रकार के दुख दूर होते हैं।
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कुत्ते को रोटी खिलाए
काल भैरव जयंती पर काले रंग के कुत्ते को रोटी या दूध जरूर देना चाहिए। ऐसा करने से भगवान काल भैरव प्रसन्न होते हैं और उनकी दया दृष्टि रहती है।
